Saturday, September 9, 2023

जातिवृत्ति

विकास क्रम की सीढ़ी पर अब हम तीसरे स्तर पर पहुंच चुके हैं, जिसे हमने कहा है जातिवृत्ति| यह परत भोगवृति की परत से ऊपर आती है| 

ऐसे व्यक्ति का जो व्यवहार है वह बहुत ही ज्यादा सामाजिक होता है, बहुत ज्यादा बहिर्मुखी होते हैं, जिसे हम अंग्रेजी में कहते हैं एक्सट्रोवर्ट| ऐसे लोग समाज में या कही भी बहुत ज्यादा सक्रिय होते हैं और हमेशा कुछ न कुछ करते रहते हैं| हमेशा अपने घर के बाहर पाए जाते हैं, लोगों से मिलते हुए या अपना कार्य करते हुए पाए जाएंगे|  

ऐसे लोग बहुत ज्यादा निडर होते हैं, किसी भी जगह, किसी भी समय, कैसा भी व्यक्ति हो, चाहे वह अजनबी हो या उनका मित्र हो, वह हमेशा उसके साथ जुड़ जाते हैं| जिन लोगों की जाति वृत्ति बहुत प्रबल होती है उनमें बहुत ज्यादा आत्मविश्वास होता है| अपने से नीचे के लोगों पर बहुत अच्छे से शासन कर सकते हैं| यह जो लोग हैं वे  उत्तरजीविता चलाने वाले होते हैं, बहुत अमीर होते हैं, इनके पास बहुत ज्यादा सुख संपत्ति होती है और बहुत ज्यादा शक्ति होती हैं | लोग उनका कहना मानते हैं| 

ऐसे लोग बहुत ज्यादा लालची भी होते हैं और बहुत ज्यादा प्रतिस्पर्धा करते हैं और बहुत ज्यादा स्वार्थी होते हैं| उनके लिए कभी भी कुछ पर्याप्त नहीं होता, हमेशा वह कुछ ज्यादा चाहते हैं, चाहे वह वस्तुएं हो या पैसा हो या संबंध हो| सब कुछ उन्हें ज्यादा चाहिए और जैसे ही वह देखते हैं कि किसी के पास उनसे भी ज्यादा कुछ है तो वह जलन महसूस करते हैं और फिर उनकी उस व्यक्ति से प्रतिस्पर्धा शुरू हो जाती है|  

यह ऐसे लोग हैं जो हर चीज में पहले स्थान पर रहना चाहते हैं| ऐसे लोग बहुत ज्यादा आक्रामक होते हैं और दूसरों से निर्देश लेना पसंद नहीं करते हैं| हर चीज से ये लोग बहुत ज्यादा अपेक्षा रखते हैं और कभी किसी चीज से संतुष्ट नहीं होते हैं और उन्हें जो चाहिए वह मिल भी जाए तो भी वह असंतुष्ट ही रहते हैं और फिर से वह भाग दौड़ में लग जाते हैं| इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उन्हें क्या मिला है, कितना मिला है, इन्हें कभी संतुष्टि नहीं होती, संतोष नहीं होता 

तो आप सोच रहे होंगे कि ऐसे लोग किस चीज के पीछे भागते हैं? तो वह पैसे के पीछे, पावर/शक्ति के पीछे या जमीन जायदाद के पीछे भागते है| ऐसे लोग पैसा जमा करते हैं या जमीन जायदाद जमा करते हैं और आप इन्हें भौतिकवादी भी कह सकते है, उपभोक्तावादी भी कह सकते हैं, पूंजीवादी भी कह सकते हैं| 

इनके राजनीतिक विचार बहुत दृढ़ होते हैं| जिस पार्टी से उन्हें फायदा पहुंच रहा है, उस पार्टी से जुड़े हुए होते हैं,  क्योंकि यदि आपको फायदा चाहिए तो आपको किसी ना किसी समूह से तो जुड़ना पड़ेगा| इसलिए यह ऐसे किसी समूह से जोड़ते हैं या ऐसी किसी पार्टी से जुड़ते हैं जिससे इन्हें फायदा हो सके| 

ऐसे लोग अपने आप को हर जगह सबसे पहले रखते हैं| यह वे लोग हैं जो हर जगह अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखवाना चाहते हैं| वे चाहते हैं कि सभी लोगों उनका नाम याद रखे| ऐसे लोग अभिमान से भरे होते हैं क्योंकि ऐसे लोगों ने अपने जीवन में बहुत कुछ हासिल किया होता है|  

सांसारिक चीजों की यदि हम बात करें तो इनकी बहुत सारी उपलब्धियां होती है और इसीलिए इनको हर चीज का इतना अभिमान होता है| इस कारण से इनमें श्रेष्ठता की भावना आ जाती है, जो कि प्राकृतिक रूप से तब होता है जब आपकी अपनी जीवन में बहुत सारी उपलब्धियां होती है| इस श्रेष्ठता की भावना को यह दूसरों पर थोपने का प्रयास करते हैं, वह दूसरों को अपने से नीचा देखते हैं दूसरों को हीन समझते हैं और वे उनको ऐसा ही रखना चाहते हैं|   

वे कभी असफल भी होते हैं तो भी बहुत ज्यादा दिखावा करते हैं| ऐसा दिखाने की कोशिश करते हैं कि वह सांसारिक रूप से बहुत ज्यादा सफल है, बहुत ज्यादा समझदार और दिमाग वाले हैं, बहुत बुद्धिमान है, होशियार है| बुद्धिमान और समझदार होने का मतलब जाने बिना, वह यह दिखावा करते हैं कि मैं बहुत बुद्धिमान और बहुत समझदार हूं और यह अपने महंगे कपड़े जूते और सामान के माध्यम से ऐसा दिखाने का प्रयास करते हैं|  

यह वह लोग है जो मशहूर लोगों के साथ फोटो खिंचवाते हैं, राजनेताओं के साथ पाए जाते हैं और फिर वह फोटो बाकी लोगों को दिखाते हैं कि देखो मेरे कितने बड़े बड़े लोगों से संबंध है| ऐसे लोग पूरे ऊपर से नीचे तक हीरे जवाहरात और सोने चांदी से लिपटे रहते हैं| उनके पास बहुत सारा सोना चाँदी होता है और वह सोना चांदी हीरे जवाहरात इसलिए नहीं पहनते कि उन्हें वह पसंद है बल्कि इसलिए पहनते हैं ताकि वह लोगों को प्रभावित कर सके और बता सके कि देखो मैं सच में कितना श्रेष्ठ हूं, देखो कितना सारा सोना चांदी और हीरे जवाहरात मैंने अपने शरीर पर पहने हैं| 

ऐसा करना संभव है क्योंकि जो लोग जातिवृति की परत से नीचे की परतों पर है, वे बहुत कम बुद्धि वाले होते हैं और उन्हें बेवकूफ बनाना, उन्हें प्रभावित करना, उन पर शासन करना बहुत आसान होता है और उनमें जो हीनता की भावना बहुत ज्यादा होती है इसलिए जातिवृति वाले लोगों का काम बहुत आसान हो जाता है| 

ऐसे लोग बहुत ज्यादा धूर्त होते हैं, चालाक होते हैं और वह जानते हैं कि किसी से भी कैसे काम करवाना है| ऐसे लोग बहुत ज्यादा मेहनती भी होते हैं और उनकी जो घड़ी है वो 24 घंटे से भी ज्यादा की होती है| उनकी काम करने की जो लिस्ट है वह बहुत लंबी होती है, उनका जो कैलेंडर है वह हमेशा भरा रहता है| यह लोग बहुत ज्यादा मेहनती होते हैं और बहुत बार असफल होने के बावजूद भी यह कोशिश करते रहते हैं और इसीलिए इतने सफल होते हैं| 

अपने जीवन में यह सुख की ज्यादा चिंता नहीं करते हैं, सही रूप में देखा जाए तो यह सुख भोग चाहते ही नहीं है| ऐसे लोगों को भोगवृत्ति से कभी भी सुख की प्राप्ति नहीं होती है| इनका काम ही इनके लिए सुख प्राप्ति का माध्यम है| इनके लिए सुख प्राप्ति पैसा कमाने में नहीं है बल्कि यह साबित करने में है कि यह दूसरों से कितना आगे है कि यदि मेरे पास आपसे ज्यादा है तो मैं खुश हूं, सफल हूं, उदाहरण के लिए कोई भी देश कितना प्रगति कर चुका है, वह महत्वपूर्ण नहीं है लेकिन वह दूसरे देशों की तुलना में कितना अधिक प्रगति कर गया है, वह महत्वपूर्ण है अर्थात तुलना| अगर तुम 10 लोगों को मार सकते हो तो मैं 20 लोगों को मार सकता हूं, अगर नहीं तो मैं तुमसे ज्यादा ताकतवर या शक्तिशाली नहीं हूं और इस तरह की जो मानसिकता है वह कभी-कभी पूरे देश भर में फैल जाती हैं|  

वह देशभक्त होते हैं क्योंकि यह उनको दूसरे लोगों पर राज करने की शक्ति प्रदान करता है| अगर किसी को लगता है कि मैं आपकी चिंता करता हूं और मैं देश की चिंता करता हूं तो ऐसे लोगों से वे लोग जल्दी प्रभावित हो जाते हैं और उन्हें और अधिक शक्ति प्रदान करते हैं या ताकतवर बनाते हैं| सिर्फ इतना ही नहीं कि वह अपने समूह, धर्म या अपने वर्ग को प्राथमिकता देते हैं, ऐसे लोग बहुत ज्यादा जातिवादी होते हैं, बहुत ज्यादा धार्मिक होते हैं या ईश्वर से प्रेम करते हैं| वह धर्म को शक्ति प्राप्त करने के एक माध्यम के रूप में उपयोग करते हैं| ऐसी वृति के लोग जानते हैं कि मेरी जाति की रक्षा ही मेरी रक्षा हैं, मेरे देश की रक्षा ही मेरी रक्षा है| यह धर्म को भी एक सामाजिक गतिविधि के रूप में देखते हैं, उसे दर्शन शास्त्र या अध्यात्म के रूप में नहीं देखते हैं| 

ऐसे लोग किसी भी धर्म को या जो भी संस्था से वह जुड़े हैं या जो भी समूह से वह जुड़े हैं उसको एक ऐसा समूह बनाना चाहते हैं जिससे वह लोगों को भ्रमित कर सके या उन पर नियंत्रण कर सके| इस प्रकार के लोगों को भ्रमित करना या अपनी बातों में लाना बहुत मुश्किल होता है| ऐसे लोग दूसरों को भ्रमित करते हैं या बदलने का प्रयास करते हैं| प्रभावित करने का प्रयास करते हैं लेकिन इनको कोई प्रभावित नहीं कर सकता है| इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई व्यक्ति कितना बुद्धिमान है, सब लोग जातिवृति के जो लोग के द्वारा ही नियंत्रित किए जाते हैं, उन्हीं के द्वारा दूसरों पर शासन किया जाता है| 

ऐसे लोग शासक बनते हैं, ये लोग करोड़पति, अरबपति या राजनेता होते हैं| आम आदमी की तुलना में इनके पास बहुत अधिक पैसा और नाम होता है| ऐसे लोग बहुत ज्यादा काम नहीं करना चाहते पर बहुत ऊँचा पद चाहते हैं, ऐसे लोग बहुत ज्यादा मेहनती होते हैं पर ये मजदूरों वाला काम नहीं करते हैं, नौकर वाला काम नहीं करते हैं| ये लोग ऊँचा पद चाहते हैं जैसे की मैनेजर, कंपनी का मालिक, बड़े पंडित, राजनेता, या कोई भी ऐसी जगह जहाँ इन्हे शक्ति मिले, आराम से पैसा मिले, दूसरों पर हुकुम चलने का मौका मिले| वे इस सामाजिक व्यवस्था की सीढ़ी को जल्दी से चढ़कर सबसे ऊपर रहना चाहते हैं| 

ऐसे लोग आपसे तभी बात करेंगे जब उनको आपसे कोई लाभ मिल रहा हो, या पैसा या अधिकार या किसी प्रकार की शक्ति मिल रही होगी| जातिवृति का अर्थ ही है - पैसा और शक्ति/पावर| भौतिकवादी होने का अर्थ भी वही है, स्वार्थी होना या आक्रामक होने का अर्थ यही हैं कि वे लोग एक ही चीज़ चाहते हैं - उत्तरजीविता, जातिवृति मतलब जीवित रहने की वृति परन्तु यहाँ उसने थोड़ा विकृत और विकराल रूप ले लिया हैं| आप अच्छे से देख सकते हैं की वो हर चीज़ को उत्तरजीविता में बदल देते हैं|  

अगर आप उनकी वाणी का अवलोकन करें तो आप पाएंगे कि यह बहुत ज्यादा बात करते हैं| यह घंटों घंटों तक बातें कर सकते हैं| बहुत ज्यादा गपशप करते हैं, यह सब एकदम बेकार की, ऊपरी सताही बातें होती है| उन बातों की गहराई में आप देख तो कुछ भी नहीं होता और अधिकांशतया या तो ये पैसे के बारे में होगा या अमीर लोगों के बारे में होगा या फिर शक्तिशाली होने के बारे में होगा, दूसरों की तुलना में बेहतर होने के बारे में होगा, और आगे जाए तो कहां पर कौन सा बिजनेस मुझे ज्यादा पैसा दे सकता है, अमीर लोग कहां रहते हैं, क्या करते हैं, क्या खरीदते हैं ये सब चीजों के बारे में यह लोग बात करते हैं|  

पैसे और पावर के जो स्त्रोत है उनके पीछे भागते हैं और उसी के बारे में बात करते है क्योंकि इनको दूसरों के ऊपर अपना आधिपत्य दिखाना होता है जिसे हम अंग्रेजी में कहते हैं - सूपेरियारिटी कंपलेक्स तो उसकी वजह से यह अपनी बहुत तारीफ करते हैं कि मैं यह हूं, मैं वह हूं, मैं इतना कमाता हूं, मैं इतने ऊंचे पद पर हूं या मैं ऐसे छोटे लोगों को पसंद नहीं करता जो मुझसे ज्यादा गरीब है और जो इस तरह के वर्ग से संबंधित है या जिनकी त्वचा का रंग इस तरह का है अदि अदि

मतलब उनकी जो बातें हैं वह पूरी तरह से किसी ने किसी बेकार तथ्य पर आधारित होती है और हमेशा "मैं" के आसपास होती है| इस तरह की बातें करके ये दूसरों को प्रभावित करना चाहते हैं| यह हमेशा ज्यादा पैसा और ज्यादा शक्ति प्राप्त करने के लिए ऐसा करते हैं| यह कभी भी किसी गरीब आदमी को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे क्योंकि यह उनका लक्ष्य नहीं है| यह उसी व्यक्ति को प्रभावित करना चाहते हैं, जो उनका प्रतियोगी हो सकता है, जिनके साथ यह कोई प्रतियोगिता कर सकता है और उनसे ज्यादा शक्तिशाली या पैसे वाला हो|

उनकी बातें नकारात्मक होती है जैसे यह ठीक नहीं है, यह टेक्स बहुत ज्यादा है, या यह चीज़ नहीं खरीद रहे हैं, या मेरे पास बहुत कम पैसा बचा है और आजकल लोग मुझसे मेरी बात नहीं मान रहे हैं, मुझे अपनी नौकरी बदलने की आवश्यकता है क्योंकि यह मुझे ज्यादा पैसा नहीं दे रही है, कोई मेरी इज्जत नहीं करता, परिवार में सब कुछ नकारात्मक ही होता है| 

दूसरों के बारे में नकारात्मक बात करते हैं और खुद के बारे में सब कुछ सकारात्मक बोलते हैं| ऐसे लोग दूसरों की पीठ के पीछे उनकी बेइज्जती करते हुए पाए जाते हैं, उनकी बुराई करते हुए पाए जाते हैं| उनके सामने यह बहुत अच्छा होने का नाटक करता है, इनकी कथनी और करनी में अंतर होता | हम कहते हैं की ये कूटनीतिज्ञ होते हैं| जो भी इनसे ज्यादा अमीर होता है, ज्यादा शक्तिशाली होता है ये उसकी बेइज्जती करते हैं| 

आपको लगेगा कि यह उनकी तारीफ कर रहे हैं जैसे कि उसे आदमी को देखो वह 500 सबसे शक्तिशाली लोग में आता है या उस व्यक्ति को देखो जो एक राजनेता है और अब शायद वह एक राष्ट्रपति बन जाएगा पर वास्तव में देखा जाए तो यह नहीं चाहते कि वह आदमी अमीर हो, वह नहीं चाहते कि वह दूसरा जो आदमी है वह कभी राष्ट्रपति बने| अगर वह एक स्कूल का प्रिंसिपल भी है तो भी यह नहीं चाहेंगे कि वह ऐसा हो|  इसलिए जो बेज्जती करने का तरीका है वह दूसरे रूप में बाहर आता है और यह अपने आप के अलावा किसी और की तारीफ नहीं करते हैं और यह जानते हैं कि अगर यह उनके सामने उनकी बेइज्जती कर तो उनका नुकसान हो सकता है इसलिए उनके सामने यह उनकी तारीफ ही करते हैं| ऐसे लोगों के लिए किसी भी तरह का नुकसान स्वीकार योग्य नहीं है, यह लोग नुकसान को स्वीकार नहीं करते हैं| किसी को मक्ख़न लगाना उनके लिए लाभकारी हो सकता है इसलिए जब ऐसे अमीर लोग उनके सामने होते हैं तो ये उनकी तारीफ करते हुए पाए जाएंगे या बहुत ज्यादा मक्खन लगाते हुए पाये जाएंगे|  

क्योंकि यह बहुत ज्यादा सामाजिक होते हैं तो लोगों के साथ बहुत जल्दी जुड़ जाते हैं| सब के साथ नहीं लेकिन वहीं जहां पर इन्हें लाभ प्राप्त करने की उम्मीद होती है तो यह उसी तरह के संबंध बनाना चाहते हैं जहां पर उन्हें लाभ प्राप्त करने की उम्मीद है और ऐसे लोगों के साथ आप बहुत जल्दी जुड़ जाते हैं| ऐसे लोग बहुत ज्यादा बहस करते हैं कि मैं सही हूं, तुम गलत हो| यह उनकी मानसिकता होती है| ये तभी आपको सही बोलेंगे जब आप उनको ऐसा करने से लाभ हो रहा हो| यदि वह आपकी तारीफ करते हैं और अपने आप को नीचे दिखाते हैं तो वो इनकी बेज्जती की तरह है इसलिए ये ऐसा कभी नहीं करेंगे| तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह कितने गलत है यह हमेशा यही साबित करने जाएंगे कि मैं सही हूं| गलत होते हुए भी वह उस चीज़ को ठीक नहीं करेंगे, वह सिर्फ अपनी तारीफ करते रहेंगे| 

ये अपना व्यवहार तभी बदलते हैं जब उसमें कोई लाभ हो रहा हो और फिर यह उसको किसी भी चीज में बदल सकते हैं क्योंकि लाभ प्राप्त करना ही इनका उद्देश्य है, उत्तरजीविता ही इनको चल रही है, उसके अलावा और कुछ नहीं|  

आप किसी भी विषय पर यदि बात करना शुरू करेंगे, ये उसको घुमा फिरा के भौतिकतावादी बातों पर या अपनी जो स्वार्थी बातें हैं, उस पर लेकर आ जाएंगे कि वह वस्तु कितनी सुंदर है या फिर अपने बारे में होगी कि मैं कितना बड़ा आदमी हूं या फिर मेरा देश कितना बड़ा है या मेरी जो जाति है वह कितनी महान है और बाकी लोग कितने बेकार हैं| यही उनकी बातें होती है| और यदि इतनी बड़ी नहीं होगी तो बहुत छोटी सी बात होगी कि मेरा बेटा बहुत ही अच्छा है, बहुत बढ़िया है, मेरी जो बेटी है वह बहुत ही अच्छी कलाकार है और आपकी बेटी एकदम बेकार सी है| हमेशा किसी न किसी की तुलना करते रहेंगे| हमेशा प्रतियोगिता की भावनाओं, या जलन की भावना होगी| समझदारी वाली या ज्यादा बुद्धि लगाने वाली चीजों के बारे में बात नहीं करना चाहते हैं या कोई नई आविष्कार के बारे में बात नहीं करना चाहते हैं| यदि कोई अविष्कार उनकी जाति के किसी व्यक्ति ने किया है तो इनको रुचि होती है, किसने किया है वह और वह इनसे किस तरह से संबंधित है, इसमें उनकी रुचि होती है, क्या किया है वो ये जानना चाहते है| इस तरह किसी भी विषय से ये फिर से उत्तरजीविता के विषय पर आकर रुक जाते है| 

यदि आप उनके विचारों का अवलोकन कर सके तो पाएंगे कि यह हमेशा इच्छा पूर्ति के बारे में ही होते हैं| यह इच्छाओं के दास होते हैं| यहां पर इच्छाओं की कोई कमी नहीं होती है और यह हमेशा अपनी इच्छा पूर्ति में व्यस्त रहते हैं| उनकी जो इच्छा है, उनका कोई अंत नहीं होता और यह हमेशा कुछ ज्यादा पाने के पीछे लगे रहते हैं| एक इच्छा पूरी हो गई, अब दूसरी और जितनी जरूरत है, उससे ज्यादा उस इच्छा को कैसे पूरी की जाए, इस बारे में ये विचार करते रहते हैं| 

ऐसे लोग बहुत ज्यादा सोते नहीं है और बहुत ज्यादा छटपटाहट में रहते हैं| आराम में नहीं रहते, इनका जो दिमाग है वह हमेशा भागता रहता है, दौड़ता रहता है और यह अपने इस भागते दौड़ते हुए दिमाग को ही बुद्धिमानी समझते हैं|
अगर आप ऐसे लोगों को ध्यान करने के लिए बैठा दे और बोले कि कुछ मत सोचो तो ऐसे लोग सबसे पहले होंगे जिनको सबसे ज्यादा असुविधा महसूस होगी| यह बोलेंगे कि तुम्हारा क्या मतलब है कि कुछ मत सोचो? इसमें क्या लाभ है? मुझे इससे क्या मिलेगा? यहां बैठे रहने से और कुछ नहीं सोचने से क्या लाभ है? क्या तुम मुझे इसका लाभ बता सकते हो? तो इस तरह ये सोना भी छोड़ देते हैं|  

एक चीज जो इन लोगों के बारे में सबसे अच्छी है, वह यह है कि यह जीवन में कुछ प्राप्त करते हैं और इसीलिए उनकी जो सोच है वह बहुत ज्यादा केंद्रित होती है उस चीज पर जिसको यह पाना चाहते हैं| ये किसी भी बिना मतलब की सोच या विचार में नहीं पढ़ते, कोई भी बेकार की कल्पना नहीं करते, कोई देवा स्वप्न नहीं देखते हैं| यह लोग बहुत ही ज्यादा व्यावहारिक होते हैं, तो उन्हें कहां जाना है, किससे बात करनी है, क्या खरीदना है, क्या बेचना है, किसको मक्खन लगाना है या किसकी पीठ में छुरा भोकना है, इस तरह की चीजों में इनका दिमाग बहुत ज्यादा केंद्रित होता है और अगर यह ऐसी विचारों में नहीं लगे हुए हैं तो यह फिर चिंता करने में लग जाते हैं| 

इनको पैसा गंवाने का डर रहता है, इनको समाजिक स्तर छूट जाने का डर रहता है, उदाहरण के लिए - जो कुछ मैंने एकत्रित किया है या तो कोई और उसे ले लेगा या कोई और मुझ से ज्यादा अमीर हो जाएगा या मैं मर जाऊंगा तो मेरे पैसे का और सारी चीजों का कौन ध्यान रखेगा, मेरा घर, मेरी जमीन आदि आदि और ऐसे लोगों को अपने रिश्तेदारों को खोने का भी डर रहता है - जैसे अगर मैं पैसा कमाना बंद कर दूंगा तो कोई मेरा ध्यान नहीं रखेगा, कोई मुझसे बात नहीं करेगा क्योंकि वास्तव में लोग ऐसे लोगों की जेब से संबंध रखते हैं पर उसे व्यक्ति से नहीं| ऐसे लोग अपना सामाजिक स्तर या  सामाजिक शक्ति को खोने से भी डरते हैं| यह निरंतर एक डर में जीते हैं कि क्या कोई मुझसे बेहतर होने का प्रयास कर रहा है? क्या मुझसे ऊपर जाने का प्रयास कर रहा है? मुझे इसके लिए कुछ करना पड़ेगा, तो इसलिए यह हमेशा कुछ ना कुछ योजना बनाते रहते हैं या कुछ गणित लगाते रहते हैं| वास्तव में इनका दिमाग इतना तेज नहीं होता कि यह बहुत बड़ी कोई योजना बना सके या कोई गणित लगा सके पर फिर भी अनुभव के आधार पर यह कुछ सोचते हैं| उसमें कुछ नया नहीं होता आविष्कारक नहीं होता| जो भी भूतकाल में उनके लिए कार्य कर गया वह उसी को दोहराते हैं और जो इनकी योजनाएं होती है वह किसी न किसी तरह की गणित होती है कि अगर मैं ऐसा करूंगा तो ऐसा हो जाएगा या मुझे वह मिल जाएगा| 

दूसरे जो सफल लोग ये बिना दिमाग लगाये उनकी नकल करते हैं, उसने ऐसा किया और वह एक करोड़पति आदमी बन गया, मैं भी वैसा ही करूंगा, कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसने क्या किया, वह सॉफ्टवेयर बेचता है, ठीक हैं मैं भी सॉफ्टवेयर बेचुंगा, वह गली में फल बेचता है, तो मैं भी गली में फल बेचुंगा, उसके पास शक्ति है क्योंकि वह पुलिस में है तो मैं भी पुलिस में जाऊंगा| यह डिग्री लेने से किसी को ज्यादा पैसे मिले हैं तो मैं भी वही डिग्री लूंगा| इस सब के अनुरूप ही इनकी मानसिकता काम करती है, बस एक ही अंतर है कि जो असफल हो गए हैं, यह उनकी नकल नहीं करते हैं| यह उन्हीं की नकल करते हैं जो ज्यादा सफल है|  

इनका सत्य जानने का कोई मापदंड नहीं होता या फिर कोई सिद्धांत या कोई ऐसी विचारधारा नहीं होती| जो भी उनको ज्यादा लाभ दे वही उनका सिद्धांत बन जाता है, वही उनकी विचारधारा बन जाती है, वही उनके लिए नैतिकता होती है वही उनके लिए महत्वपूर्ण होता है तो यह अपनी जो अवधारणाएं हैं उनको बहुत जल्दी बदल लेते हैं| किसी पार्टी का समर्थन करने से यदि उनको लाभ हो रहा है तो वह उसका समर्थन करना शुरू कर देते हैं और पार्टी अगर चुनाव हार जाती है और फिर एक ही दिन में उनकी जो अवधारणाएं हैं वह बदल जाती हैं और फिर वह दूसरी पार्टी का समर्थन करने लगते हैं क्योंकि वही उनके लिए ज्यादा लाभकारी होगा| 

यदि आप उनके रिश्तों का संबंधों का अवलोकन करें तो आप पाएंगे कि उनके जो रिश्ते हैं वह वास्तव में व्यापार है|  उनके रिश्ते इस बात पर निर्भर करते हैं की उन्हें उसे रिश्ते से कितना ज्यादा मिल सकता है और कितना कम उनको देना पड़ेगा| यह हमेशा एक लाभप्रद रिश्ता चाहते हैं|  

यह बहुत अच्छे प्रदाता होते हैं, क्योंकि इनके पास बहुत कुछ होता है, बहुत कुछ इकट्ठा करके रखते हैं| ऐसे लोगों के पास बहुत सारी जमीन जायदाद और पैसा होता है| सारे जो संसाधन है उनको ये इकट्ठा करके रखते हैं, यह उनका नियंत्रण करते हैं इसलिए यह बहुत अच्छे प्रदाता होते हैं और जो पशुवृति के लोग हैं वह उनके बहुत अच्छे संबंधी बन जाते हैं क्योंकि उन्हें आवश्यकता होती है और ऐसे लोग दे सकते हैं और इस तरह ऐसे लोग दूसरे लोगों का अपने लाभ के लिए उपयोग कर सकते हैं| इसलिए ऐसे रिश्ते ज्यादा लंबे चलते हैं और इसके अलावा और कुछ भी जो होगा वह असफल ही होगा|  

ऐसे लोग शादी भी फायदे के लिए ही करते हैं या फिर सामाजिक स्तर को बनाए रखने के लिए करते हैं| ये लोग इसलिए शादी नहीं करते हैं कि सामने वाला व्यक्ति अच्छे स्वभाव का है या सुंदर दिखता है या पढ़ा लिखा है, नहीं उनके पास कितना पैसा है? वह मुझे क्या दे सकते हैं? या फिर उनके संबंधी यदि समाज में किसी ऊंचे पद पर है तो वह वही देखते हैं| उसके अलावा कुछ नहीं देखते| यहां तक की उम्र को भी नजरअंदाज कर देते हैं, एक बहुत ही छोटी लड़की एक बूढ़े व्यक्ति से शादी करने के लिए तैयार है क्योंकि वह शक्तिशाली और अमीर है और उसका सामाजिक स्तर बहुत अच्छा है और एक आदमी किसी भी ऐसी लड़की से शादी करने के लिए तैयार हो जाएगा जिसके पिताजी अमीर हो या शक्तिशाली हो 

ऐसे लोग, दूसरे लोगों को नौकरी प्रदान करते हैं यह उनके शासक होते हैं| ऐसे लोग फौजी बनाते हैं, नौकरी देने वाला और नौकरी करने वाला, शासन करने वाला और शासित इस तरह के सम्बन्ध रखते हैं| उदाहरण के लिए - मैं किसी ऐसे व्यक्ति का दोस्त हूं, क्यों? क्योंकि यह मेरी उत्तरजीविता के लिए आवश्यक है और मैं इस व्यक्ति का दुश्मन हूं क्योंकि वह मुझे किसी भी दिन मर सकता है, वह मुझसे ज्यादा शक्तिशाली हो सकता है, वह मुझसे ज्यादा अमीर हो सकता है, इसलिए मेरा दुश्मन है और यही संबंध है जो इन लोगों को समझ में आते हैं कुछ और नहीं| ये इसे प्यार कहते हैं पर जब उनको वहां से कोई फायदा होता हुआ नजर नहीं आ रहा है तो उनकी प्यार की परिभाषा अलग हो जाती है|  

यह अपने ऊपर लोगों को निर्भर रखना पसंद करते हैं और दूसरों पर निर्भर रहना बिलकुल पसंद नहीं करते| ऐसे लोग अमीर लोगों के साथ संबंध बनाना पसंद करते हैं अगर वहां पर कोई लाभ न हो तो कोई रिश्ता नहीं बनता|
यह किसी से संबंधित होते भी हैं तो वह सारे रिश्ते पूरी तरह से नकली होते हैं, उनमें कोई भी सच्ची भावना होती ही नहीं है| कोई भी प्यार या चिंता या अच्छी भावना यह अभिव्यक्त करते हैं तो वह सिर्फ दिखावटी होता है 

आप कह सकते हैं कि यह लोग पैसे और शक्ति और चीजों से प्यार करते हैं पर वह वास्तव में क्या वो प्यार है? नहीं, वह एक बंधन है| यह उन चीजों से बंधे हुए हैं और उसके बिना रह नहीं सकते| 

जब भी यह कोई रिश्ता बनाते हैं तब यह बहुत ज्यादा स्वार्थी होते हैं| ऐसे लोग बहुत ज्यादा शासन करने की प्रवृत्ति रखते हैं और चाहते हैं कि दूसरे लोग इनकी बात माने| इस मामले में यह अपने बच्चों को भी नहीं छोड़ते और अपने बच्चों को एक लाभ बनाने की मशीन बना देते हैं कि तुम यह बनोगे और तुम इस व्यक्ति से शादी करोगी ताकि मेरा नाम हो मेरा पैसा बढ़े, तुम मेरे व्यवसाय में जुड़ जाओ ताकि उनकी कंपनी में एक और दास हो, एक और नौकर हो, चाहे फिर वह उनके रिश्तेदार हो या उनका खुद का बेटा हो| वह उसका उपयोग करेंगे 

इनको जो परिवार है बहुत बड़े होते हैं और वो इसलिए नहीं कि इनका परिवार पसंद है पर इसलिए क्योंकि संपर्क क्षेत्र बढ़ता है| हर कोई इनका चाचा होता है या भतीजा होता है या ऐसा ही कुछ| 

वो सिर्फ तभी तक जब तक वह एक अच्छे पद पर है, पर जैसे ही कोई गरीब होता है या अपनी शक्ति खो देता है या दिवालिया हो जाता है या जिसका नाम उतना अच्छा नहीं रहता है, तो फिर यह कह देते हैं कि - नहीं, यह मेरा संबंधी नहीं है, वह मेरा परिवार का सदस्य नहीं है|  

ऐसे लोग हमेशा बेटों का पक्ष लेते हैं, बेटियों का नहीं| क्योंकि अधिकांशतया भारत जैसे देश में जो बेटियां हैं उन पर आपको पैसा खर्च करना पड़ता है और बेटे जो है उससे उनको फायदा मिलता है| क्या कहेंगे - अरे बेटियाँ तो पराये घर चली जाएँगी, सेवा तो बेटा ही करेगा, आपने भी बहुत लोगों को ऐसा बोलते हुए सुना होगा| 

इतिहास में बहुत पहले की बात नहीं है कि लोग बहुत सारी औरतों से शादी करते थे ताकि वह अपने परिवार को बढ़ा सके और बहुत बड़ा परिवार हो और बहुत सारे लोगों से उनका संपर्क हो सके और ज्यादा बेटे पैदा कर सके| वह जो प्रवृत्ति है अभी गयी नहीं हैं, यही हैं, वह अभी भी पाई जाती है| 

यदि आप उनके मनोरंजन के साधन को देख तो आप पाएंगे कि यह देखते हैं कि दुनिया में अभी क्या चल रहा है? किसके पास ज्यादा शक्ति है? किसने किसको मारा है? कहाँ पर क्या वाद-विवाद चल रहा है? 

यह हमेशा अपने टीवी पर चिपके रहते हैं, यह देखने के लिए की समाचार चैनल पर क्या चल रहा है? या फिर अगर कोई मैच चल रहा हैं तो अपने देश की टीम जीत रही हैं या नहीं? उनकी तरह के जो लोगे है वे जीत रहे हैं या नहीं 

राजनीति में रुचि रखते हैं क्योंकि राजनीति उनके लिए मनोरंजन का साधन है| दूसरों को कैसे हराकर ज्यादा शक्ति हासिल की जाए यह उनका मनोरंजन है|

ह व्यापार में रुचि रखते हैं या लेनदेन में रुचि रखते हैं क्यों? क्योंकि इससे देश को फायदा हो रहा है? या लोगों का फायदा हो रहा है? नहीं, यह इसलिए देखते हैं क्यूंकि इससे इनका खुद का फायदा हो रहा हैं|  

यह किसी भी धर्म रुचि रखते हैं क्योंकि यह धार्मिक होते हैं? नहीं, बल्कि इसलिए रुचि रखते हैं क्योंकि इससे इनको दूसरों के ऊपर शक्ति मिलती है, ताकत मिलती है| यह एक धार्मिक प्रवृत्ति दर्शाते है और देशभक्ति दर्शाते हैं क्योंकि इससे उनका फायदा हो रहा है|  

यह किसी भी चीज के बारे में अनंत कल तक गपशप कर सकते हैं, जो कभी खत्म नहीं होती| यह सब चीज के बारे में सब कुछ जानते हैं|  

यह वो कहानी पसंद करते हैं जिसमें यह जान सके कि कैसे कोई आदमी अमीर बना है और किस राष्ट्रपति ने या देश के नेता ने क्या किया और किस राजा ने कितने लोगों को मारा और वहां पहुंचने के लिए उन्होंने क्या किया? 

यह बहुत सारी आत्म-उत्थान/ सेल्फ हेल्प की किताबें पढ़ते हैं, उनके शीर्षक होंगे कि कैसे 10 दिन में एक सफल व्यक्ति बन जाए? कैसे एक कंपनी का मालिक बन जाए? कुछ दिनों में कैसे ज्यादा पैसा कमाया जाए? 

यह ऐसी तरह की फिल्मों में रुचि रखते हैं जिसमें बहुत ज्यादा लड़ाई झगड़ा हो और बहुत ज्यादा आक्रामकता हो, कोई गलत काम हो रहा हो, जुर्म हो रहा हो, या राजनीति हो, अपराध हो रहा हो, जो लड़ाई झगड़े की फिल्में हैं, जो उनको उत्साहित करें, उनकी जो प्रवृत्ति है, उनकी जो सोच है, जातिवृति को दर्शने वाली, ऐसी तरह की फिल्मों में इनको बहुत ज्यादा रुचि होती है|  

यह लोग महत्वपूर्ण लोगों के साथ समय बिताना चाहते हैं क्योंकि वह उनके लिए मनोरंजन होते हैं|  

आप देख सकते हैं कि यह एक तरह की बीमारी है और अधिकांश लोग इन तीन परतों में ही पाए जाते हैं जो हमने अब तक जानी है और इसलिए यह एक मानसिक विकार नहीं समझा जाता है और इसको सामान्य माना जाता है| वहां पर एक सीमा रेखा है और उस सीमा रेखा को यदि आप पार कर लेते हैं तो फिर जो जातिवृति है वह विकार में बदल जाती है और जो पहला मानसिक विकार इन लोगों में होता है वह है भ्रष्टाचार, 

पैसा और पावर लोगों को भ्रष्ट बना देता है, मुख्य रूप से जो जातिवृति के लोग हैं, पर यदि वह व्यक्ति पशुवृति और भोगवृति की परत पर है तो वह भी भ्रष्ट हो जाते हैं| 

लोग भ्रष्टाचार के बारे में शिकायत करते हैं और राजनीति में जो तानशाही या परिवारवाद है उसके बारे में शिकायत करते हैं या जो ज्यादा पैसे मिलने वाली जो नौकरियां हैं उनमें जो भ्रष्टाचार है उसके बारे में शिकायत करते हैं, जैसे वकील हो, डॉक्टर हो, या जो कंपनी के मालिक हो, सब भ्रष्ट है, लालची है और ऐसा क्यों है? क्योंकि वहां पर यह जो जातिवृति की परत है, वह मानसिक विकार के रूप में बदल गई है और ऐसे ही लोग उसी तरह के पद पर पाए जाते हैं|  

और जो भ्रष्ट नहीं है, वह वहां पर पहुंच ही नहीं पाते, और जो लालची नहीं है वह तो इस तरह के युद्ध हार ही जाते हैं, जो आक्रमक नहीं है उनके पास कोई शक्ति नहीं है और बहुत ही स्वाभाविक है| 
 
आप यह पाएंगे की भ्रष्ट लोग ही जो सबसे ज्यादा शासक वर्ग में पाए जाते हैं| भ्रष्ट लोग ही सब जगह शासन करते हुए पाए जाते हैं| इस पृथ्वी पर जहाँ भी जो भी  शासन करता है वह हमेशा भ्रष्ट होंगे और आप इसको ठीक नहीं कर सकते| 

अपना जो स्तर है, या पदवी है उसको बनाए रखने के लिए यह लोग छल-कपट का उपयोग करते हैं जो की एक दूसरा मनोविकार है|  

ऐसे लोग बहुत जल्दी यह बात सीख जाते हैं कि जो वह है वह बने रहने के लिए इनको जो अधिकांश लोग को किसी ने किसी तरह के धोखे में रखना है, इसलिए वह झूठ बोलते हैं| कभी भी ऐसे शब्द नहीं बोलते जो सत्य बताता हो| 

यह एक बहुत ही अजीब तरह का व्यवहार दर्शाते है, जैसे कि वह कभी-कभी अपने आप को मानवता का एक सेवक बताएंगे, दास बताएंगे, फिर भले ही महलों में रह रहे हो और 20-25 लग्जरी गाड़ियां चला रहे हो| उनके नीचे जो काम करते हैं वह जानते हैं कि वह पूरी तरह से एक सेवक है और इसलिए उसको ज्यादा पैसे देने की जरूरत है ताकि वह मेरी सेवा कर सके और क्योंकि अधिकांश लोग पशुवृति की परत पर हैं तो इसलिए उनको पागल बनाना बहुत आसान है, उनको अपने फायदे के लिए बदलना बहुत आसान है और हम यह सोचते रहते हैं कि क्यों लोगों ऐसे लोग को वोट देते हैं जो झूठ बोलते हैं? क्योंकि उनके पास सही गलत को समझने की शक्ति नहीं होती| यह बता नहीं सकते कि क्या सही है और क्या गलत है| वह अमीर लोग देखते हैं, सोना देखते हैं, पैसा देखते हैं, शक्तिशाली लोग देखते हैं, बॉडीगार्ड जिनकी सुरक्षा कर रहे होते हैं और वह अपने आप उनको भगवान मान लेते हैं|  

कोई प्रश्न नहीं पूछा जाता और अगर कोई कुछ कहता भी है तो जो जातिवृत्ति के लोग इतने शक्तिशाली होते हैं कि वह उनको मरवा देते हैं तो कोई भी उनके बारे में कुछ कहने की हिम्मत ही नहीं करता| वह जमीन जायदाद पैसा और पावर या शक्ति के लिए कुछ भी कर सकते हैं| उनके कोई नैतिकता के सिद्धांत नहीं होते| जो भी उनको शक्ति और लाभ प्रदान करें वह उनका नैतिकता का मापदंड बन जाता है| यह कभी-कभी इतना ज्यादा हो जाता है कि वह पूरे ही समूह को, पूरे ही देश को, सारे लोगों को अपनी शक्ति का प्रभाव दिखाने के लिए उपयोग कर लेते हैं| 

ऐसे लोग बहुत जल्दी तानाशाह बन जाते हैं और यह बहुत ही बड़े पैमाने पर जो हत्याएं होती है उसके लिए जिम्मेदार होते हैं| और ज्यादा शक्ति प्राप्त करने के लिए, ज्यादा जमीन प्राप्त करने के लिए, ज्यादा फौज इकट्ठा करने के लिए, यह ऐसा करते हैं|  

उनके लिए एक घर काफी नहीं होता है, 20 घर काफी नहीं होते हैं, पूरा एक जिला छोटा होता है, पूरा देश? - नहीं इतना भी नहीं, उससे भी ज्यादा चाहिए| मुझे दूसरे देश भी चाहिए| तो इसलिए यह बहुत बड़े पैमाने पर हत्याएं करवाते हैं, आक्रमण करवाते हैं, रेप करवाते हैं, लोगों को लूटते हैं और अपने आप को शक्तिशाली या दूसरों से ज्यादा शक्तिशाली घोषित करते हैं|  

यह प्रचार करते हैं कि हम जो भी कर रहे हैं वह इसलिए कर रहे है क्योंकि हम दूसरों से ज्यादा ताकतवर हैं और जो लोग हमसे ज्यादा कमजोर हैं उनको मर जाना चाहिए| अगर कोई धार्मिक नेता ऐसा है तो वह कहेगा कि हम भगवान के लोग हैं या ईश्वर के लोग हैं, हम सही हैं और बाकी लोग गलत है और बाकी लोग शैतान है और उनको मारना चाहिए और जिसकी भी वह पूजा कर रहे हैं वह ईश्वर नहीं है| जिन लोगों को वे नियंत्रित कर रहे हैं वे लोग बिना दिमाग वाले जोंबी की तरह होते हैं, पहले से ही मरे हुए हैं, उनको जो कहा जाता है वह वैसा करते हैं, जो उनको आदेश दिया जाता है उसको मान लेते हैं|  

जो अमीर और शक्तिशाली है उनका आदेश फटाक से मान लेते हैं| उनका छोटा सा जो प्रचार बहुत कुछ कर देता है| 

ऐसे लोग संचार के जो माध्यम हैं और समाचार के साधन है उनको भी नियंत्रित करते हैं| तो थोड़ा सा घूस देकर या थोड़ा सा पावर के साथ बहुत कुछ कर सकते हैं| अपना दास बनाने के लिए यह लोगों को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं, चालाकी करते हैं| ये नहीं चाहते हैं कि लोग जागे या बहुत ज्यादा अमीर बन जाए या बहुत ज्यादा समझदार बन जाए इसलिए शिक्षा प्रदान करने के जो संस्थान है या जो शिक्षा व्यवस्था है वो उनके द्वारा नियंत्रित की जाती है ताकि कोई भी उनसे ज्यादा समझदार ना बन पाए या उनसे आगे ना निकल जाए|  

ऐसे लोग इंटरनेट को भी नियंत्रित करके रखते हैं या समाचारों को भी नियंत्रित करते हैं और आपकी टीवी पर कब क्या देखेगा वो सब उनके नियंत्रण में होता है| गलत तरह के समाचार या खबरें फैलते हैं|  

दो ही तरह से आप लोगों को बेवकूफ बना सकते हैं या तो आप उन्हें झूठ बोलकर फसा ले या फिर अगर कोई खबर फैल जाए तो उसको बदल करके उनके सामने पेश किया जाए कि यह ऐसा नहीं ऐसा है और फिर उनको फिर से पागल बनाए |  

जब सब कुछ असफल हो जाता है तो फिर ये लोग बहुत ज्यादा आक्रामक बन जाते हैं और फिर जानते हैं कि कैसे बंदूकों और बमों का इस्तेमाल करना है| जो नीचे की परतों के लोग हैं वे वैसे ही बहुत डरपोक होते हैं तो बिना कुछ किए सिर्फ इतना सा नाम लेने से ही वह लोग डर जाते हैं, सिर्फ इतना बोलना कि "मैं तुम्हें मार दूंगा" अपना काम करवाने के लिए या उन्हें डराने के लिए काफी है| जो भगवान को मानने वाले और न्याय को मानने वाले लोग हैं उनको डरा कर अपने नियंत्रण में रखने के लिए ऐसा कुछ करना काफी होता है|  

अगर कोई और इनसे ज्यादा शक्तिशाली हो जाता है और बाकी सारे जो संसाधन है उनका नियंत्रण करने लगता है तो यह सारे लोग इकट्ठा हो जाते हैं और अपनी एक फौजी बना लेते है, एक समूह बना लेते हैं और दूसरों पर आक्रमण कर देते हैं| यह सब नया नहीं है, यह तब से हो रहा है जब इंसान बंदर था| इसलिए मैंने इसको देशभक्ति की प्रवृत्ति या कोई और नाम नहीं दिया है| मैंने इसको जातिवृत्ति का नाम दिया है क्यूंकि मनुष्य ये शुरुआत से कर रहा है और इसी तरह से जिंदा रहा हैं| इसी प्रवर्ति के कारण उन्होंने बाकी सारे जानवरों को मिटा दिया, उन्होंने अपने जो सबसे पास वाले संबंधित है उनको भी मिटा दिया, उन्होंने बाकी जो मानव जाति की प्रजातियां थी उनको भी हटा दिया, अब ये कोशिश कर रहे हैं उनको मिटाने की जो उनसे थोड़ा सा भी अलग हो| क्यों? क्यूंकि उत्तरजीविता इसी तरह चलती है| 

प्रकृति ने मनुष्य को नफरत की भावना इसीलिए दी है ताकि वह जिंदा रह सके और और यह जो जाति है वह बनी रही है| परन्तु बिना आवश्यकता के जब इसको उपयोग में लाते हैं तो यह एक मनोविकार बन जाता है और अगर इसका नियंत्रण नहीं किया जाए तो यह पागलपन बन जाता है और हमारे पास ऐसे बहुत सारे उदाहरण है लोगों के जो पागल है, पर शक्तिशाली और अमीर है|  

ऐसे लोगों ने इंसानियत को इतना ज्यादा नुकसान पहुंचाया है कि अब वह लोग इतिहास में अविस्मरणीय हो गए हैं उनका नाम बताने की भी आवश्यकता नहीं है, आप सब जानते हैं|  

जिसके भी पास शक्ति है वह पागलपन से सिर्फ एक कदम दूर है| अगर आप राजाओं का अवलोकन करें तो आप पाएंगे कि वह एक अपराधी होने से सिर्फ एक कदम दूर है, वह पागल होते हैं और इंसानियत के लिए बहुत बड़ा खतरा है| यह इंसानियत पर एक कैंसर की तरह है| 

कोई और इस तरह का कार्य नहीं करता| हम विकासक्रम की बहुत सारी परतों के बारे में जानने वाले हैं पर इस प्रवृत्ति से ज्यादा और खतरनाक कोई नहीं हैं| जब मैं आपको पशुवृत्ति के लोगों के बारे में बोलती हूँ तो आपने सोचा होगा कि यह तो बहुत ही नीचले प्रकार के लोग होते हैं पर याद रखिए यह बहुत ही ज्यादा साधारण और अज्ञानी  होते हैं और किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचते हैं, किसी भी तरह के प्राकृतिक हानि नहीं करते हैं और दूसरों को भी हानि नहीं पहुंचते हैं, जीवो को या अपने जैसे लोगों को हानि नहीं पहुंचते हैं|  

परंतु जातिवृति के लोग एक बहुत बड़ी समस्या है, इनके पास जो दिमाग है, वह बहुत तेज है, कैसे सबकुछ नियंत्रित करना है यह तो वह जान गए हैं लेकिन उनके पास अभी तक समझदारी नहीं आई है कि कैसे उसको बनाए रखना है, कैसे कुछ नया करना है, कैसे यह जानना है कि क्या नहीं करना है|  

यह बहुत ही खतरनाक स्थिति है जहां पर आपके पास चाकू हैं पर आप उससे लोगों के गले काट रहे हैं, वही चाकू फल काटने के उपयोग में भी लाया जा सकता था या कुछ अच्छा किया जा सकता था|    

आप सोचेंगे कि भोगवृति के लोग बेकार होते हैं क्योंकि वह सुख प्राप्ति के पीछे भागते रहते हैं| सुख प्राप्त करने के लिए झूठ बोलते हैं पर ऐसा नहीं है| ऐसे लोग बहुत कम नुकसान पहुंचाते हैं परंतु जाति-वृत्ति के लोग जिनमें यह वृति बहुत ज्यादा बढ़ गई है, जो एक मनोविकार के रूप में बदल गई है, वह बहुत बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाते हैं| वह पूरी मानवता को एक ऐसे स्तर पर ले जाते हैं जो पशुओं से भी नीचे है 

एक चीज़ आप देख सकते हैं कि उनके अंदर एक अच्छा गुण है कि वह दुनिया को चला रहे हैं, वह जो व्यवसाय है उसको चला रहे हैं, वह अपनी सुरक्षा करने में बहुत अच्छे हैं, दूसरों से अपनी रक्षा करने में बहुत अच्छे हैं और अच्छे नेता हैं, अच्छे शासक हैं और लोग उनकी बात मानते हैं और जानते हैं कि कैसे न्याय और व्यवस्था को बनाए रखा जाए और कैसे नौकरी प्रदान की जाए और इसी कारण से वह विकास क्रम के तीसरे स्तर पर हैं और इसलिए वह सबसे नीचे नहीं है और इसीलिए यह बहुत जल्दी एक मनोविकार भी बन जाता है

आप देख सकते हैं कि यह जो सीमा रेखा है उसको बहुत जल्दी क्रॉस करते रहते हैं, बहुत बार सीमा पार करते रहते हैं और जब भी ऐसा होता है तब वह आपकी एक ताजा खबर बन जाती है, एक बड़ी खबर| 

तो ऐसे लोगों के लिए मार्ग का जो सुझाव है वह क्या है? तो क्योंकि ऐसे लोग बहुत ज्यादा सक्रीय होते हैं, इनमें बहुत ज्यादा ऊर्जा होती है तो कर्म योग का मार्ग सुझाया जाता है, जहां पर आपको यह सीखना होता है कि सही कार्य क्या है, सही कर्म क्या है और अगर आप सही कर्म करते हैं तो आप आगे बढ़ सकते हैं|  

यदि आप बहुत ज्यादा शक्तिशाली है, बहुत ज्यादा अमीर है तो सेवा और दान का सुझाव दिया जाता है ताकि लालच और स्वार्थ को नियंत्रण में रखा जा सके|  

कुछ लोगों को यह सब करना पसंद नहीं आएगा तो ऐसा सुझाव दिया जाता है कि आप किसी देवता की पूजा करें कुछ देवी देवता है जो आपको अपनी इच्छाओं की पूर्ति करने का वरदान दे सकते हैं क्योंकि अमीर होने की और शक्तिशाली होने की जो इच्छा है वह बहुत बड़ी है और लोगों को हराने की और अपने दुश्मनों को मारने की जो इच्छा है बहुत प्रबल है तो फिर देवी देवता इसकी रक्षा करेंगे, उसका ध्यान रखेंगे और फिर यह उस देवता की जिम्मेदारी बन जाती है कि उस व्यक्ति को वहां से बाहर निकले, इस पागलपन से बाहर निकले| जो देवता है वह आपको सब कुछ देगा पर आपको इस परत से बाहर भी निकाल देंगे, अगर आप एक सही देवता की पूजा कर रहे हैं|

ऐसे लोग की प्रवृत्ति होती है अपने जैसे लोगों को फायदा पहुंचाने की या समर्थन करने की तो यह बहुत ज्यादा बड़े धार्मिक योद्धा बन सकते हैं और इस प्रवृत्ति का उपयोग करके जो धर्म है उसकी रक्षा की जा सकती है| उदाहरण के लिए कोई धर्म हो सकता है जिसकी अपनी खुद की एक फौजी हो, जो की बहुत अच्छी बात नहीं है पर फिर भी यह उसका एक सकारात्मक पहलु है, अच्छी बात है, जहां पर आप ज्ञान की रक्षा कर रहे हैं|  

जो ज्ञान है उस पर हमेशा आक्रमण किया जाता है और आक्रमण क्यों किया जाता है? क्योंकि लोगों को बेवकूफ बनाए रखने में किसी का फायदा हो सकता है तो इसलिए ये जो प्रवृत्ति है उसका उपयोग ज्ञान की रक्षा करने में किया जा सकता है और जो सत्य है उसको भ्रष्ट होने से बचाने में किया जा सकता है और इसलिए ऐसे लोग एक धार्मिक योद्धा बन जाते हैं| 

जो विनाशकर्ता है उसको एक रक्षक में बदला जा सकता है तो आप देख सकते हैं कि यह जो भाग है वह बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण भाग है मानव विकास का पर यह सिर्फ एक शुरुआत है| हम विकास कर्म की अपनी इस चर्चा को आगे जारी रखेंगे और इन सब के बारे में हम बात करेंगे अगले चरण में बहुत-बहुत धन्यवाद        
 

Wednesday, August 2, 2023

भोगवृति

नमस्कार,
ज्ञानांजलि में आप सभी का स्वागत है|  
आत्ममूल्यांकन की इस श्रृंखला में आज हम चर्चा करने वाले हैं  मानव विकास क्रम की दूसरी परत के बारे में  जिसे हमने भोगवृति  की परत कहां है| 

यदि हम इनके व्यवहार का अवलोकन करें तो आप पाएंगे कि ऐसा व्यक्ति हमेशा सुख प्राप्ति के पीछे लगा रहता है और किसी भी तरह का दर्द या पीड़ा नहीं चाहता है|  किसी भी तरह की मेहनत नहीं करना चाहता है|  किसी भी तरह का खतरा मोल नहीं लेना चाहता है और वही पाए जाते हैं जहां पर इन्हें सुख मिल रहा हो | 

खुशकिस्मती से ऐसे लोगों कों उत्तरजीविता की चिंता नहीं होती क्यूंकि उनके पास बहुत पैसा होता है

शायद उनके माता-पिता हैं बहुत पैसे वाले होते हैं, बहुत अमीर होते हैं और इसलिए उन्हें  बहुत आसानी से सबकुछ मिल जाता है|  इस कारण उनके पास रहने और मजे मौज मस्ती करने के अलावा और कुछ और बचता नहीं है

ऐसे लोग अधिकांश रूप से काम ना करने में और जो किसी भी आसान तरीके से पैसा कमाने का प्रयास करते हैं 
ये लोग शॉर्टकट चाहते हैं 

उन्हें अगर नौकरी भी मिलती है तो वह किसी ना किसी रिश्ते नाते की वजह से ही मिलती है या उनका कोई संपर्क होते हैं उन्हें नौकरी इसलिए नहीं मिलती क्योंकि वे उसके लायक है बल्कि इसलिए मिलती है क्योंकि उनके अच्छे संपर्क होते हैं या उनके कुछ अच्छे रिश्ते होते हैं|  

और ऐसे लोग अपना काम दूसरों पर थोपने का प्रयास करते हैं और यदि पैसा कमाते भी हैं तो वह सिर्फ खुशी प्राप्त करने के लिए , यदि पैसा उनको बहुत ज्यादा सुख दे रहा है तो ही वह उसको कमाने में रुचि रखते हैं ,नहीं तो कुछ नहीं करते है  

उन्हें अपने जीवन में एक ही डर होता है और वह है दर्द या पीड़ा का या मृत्यु का क्योंकि उन्हें लगता है कि यह जो दो चीज है वह उनके सुख प्राप्ति के रास्ते में बाधा है और इसी कारण से उन्हें जो वृद्धावस्था है या जो बुढ़ापा है उससे भी डर लगता है

ऐसे लोग अपनी उम्र छुपाने का प्रयास करते हैं, अपने बालों को काला रखते हैं या कुछ ऐसा दिखाने का प्रयास करते हैं जिससे उनकी उम्र छुपा सके 

ये लोग अपने सामान से और चीजों से बहुत ज्यादा आसक्त होते हैं, जुड़े हुए होते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्हें सामान से खुशी मिल रही है|  वह अपने स्वयं के शरीर को भी एक सामान की तरह ही उपयोग करते हैं जिससे उन्हें सुखभोग मिल सके

यही नहीं, वे दूसरों के शरीर को भी सामान की तरह समझते हैं और उसे सुख की प्राप्ति करना चाहते हैं|  

ऐसे व्यक्ति दूसरों को भी एक वस्तु की तरह ही देखते हैं 

और ऐसे लोग आपसे तभी संपर्क करेंगे जब वे आप से किसी तरह के सुख प्राप्ति की उम्मीद कर रहे हैं, उसके अलावा उन्हें आप में  कोई रुचि नहीं होगी या फिर कभी कभी आपसे संपर्क करेंगे ताकि वह अपना समय काट सके क्योंकि वह बोर हो रहे हैं तो वह आपको फोन करेंगे या फिर आपको मैसेज करेंगे क्योंकि वह कुछ मनोरंजन चाहते हैं 

तो इस तरह कुछ पंक्तियों से आपको उनकी मानसिकता के बारे में पता चल सकता है या आप उनको एक चित्र के रूप में चित्रित कर सकते हैं और आप जान सकते हैं कि बहुत सारे लोग जिन से आप मिले हैं वह इस परत पर हैं|  

यदि आप उनकी बातों पर ध्यान दें उनकी वाणी का अवलोकन करें तो आप पाएंगे कि वह सिर्फ उस बारे में बात करते हैं जिससे उनको सुख की प्राप्ति हुई है, जैसे कि वह कहां घूमने गए, उन्होंने क्या खाया, उनके कौन कौन से साथी रहे  है, थिएटर में कौन सी पिक्चर लगी है, कौन सा संगीत अच्छा है, कौन से कपड़े अच्छे हैं, जूते कौनसी कम्पनी के सबसे अच्छे होते है आदि आदि...  

वह इसी तरह की चीज़ों के बारे में बात करेंगे और भी चीज़ें है जैसे उन्हें क्या चाहिए और कितना अच्छा होगा अगर उन्हें वह चीज मिल जाए|  

कभी-कभी उन्हें दर्द या पीड़ा होने का डर भी लगता है और यह बात भी वे अपनी वाणी से अभिव्यक्त करते हैं की किस चीज का उन्हें डर है और किस चीज से घबराते हैं या कोई ऐसी चीज जो उन्हें सुख प्रदान नहीं कर रही है तो उसके बारे में चिंता करते हैं| 

यदि कोई चीज सुख प्रदान नहीं करती है तो वह उसकी शिकायत भी करते हैं और उसके बारे में अपनी चिंता व्यक्त करते हैं 

वह ज्यादा शिकायत तब करते हैं जब उनके जो सुख प्राप्ति के साधन है वे उनसे छीन लिए जाते हैं|  

यदि आप उनकी बातों को देखे तो जो उनकी बातें हैं, जो गपशप है, वह बोरिंग नहीं होती है या अरुचिकर नहीं होती है|  उनमें बहुत ज्यादा मसाला होता है बहुत ज्यादा मनोरंजक होती है| ऐसे लोग बहुत अच्छे वक्ता बनते हैं या मनोरंजन बहुत अच्छा करते हैं|  

वह दूसरों का मनोरंजन करते हैं क्योंकि उससे उनका खुद का मनोरंजन होता है और यह जीवन को बहुत ज्यादा मनोरंजक लगती है|

आप किसी भी विषय पर बात कर रहे हो, चाहे वह कोई भी बात हो, राजनीति की कोई बात हो या कोई और बात हो उससे ये  सीधा अपनी इच्छाओं की अभिव्यक्ति पर आ जाते हैं या फिर वह ऐसी बात करेंगे कि कौन सा एक्टर अच्छा है या कौन सी अभिनेत्री अच्छी दिखती है, कौन सा अभिनेता अच्छा है| किसी एक विषय पर बात करने की बजाय सिर्फ यह बात करते हैं कि उन्हें क्या चाहिए और क्यों चाहिए|  

आप देखेंगे कि इनका जो अहंकार है वह बहुत प्रबल होता है और वह पूरी तरह से मैं - मैं  रहता है उनका व्यवहार देखने की आवश्यकता नहीं है अगर आप भी करें तो भी आप जान जाएंगे या फिर आप उनसे थोड़ा सा बात करें तो आप जान जाएंगे या 

फिर एक चित्र देखकर भी आप जान सकते हैं की ऐसा व्यक्ति किस तरह का है |  

उनके पास बात करने के लिए बहुत अच्छा कुछ नहीं होता है फिर भी उन्हें कहीं ना कहीं हमेशा कोई ना कोई मिल जाता है बात करने के लिए क्यूंकि कौन है जो खुशी नहीं चाहता, कौन है जो आनंद में नहीं रहना चाहता| 

जैसे जैसे ये लोग बड़े होते हैं वे एक ही बात को दोबारा करने लगते एक ही जैसी बातें करते हैं और ज्यादातर झूठ ही होता है जिसमें वह मसाला लगाकर झूठ बोलते रहते हैं|  

यदि आप उनके विचारों का अवलोकन करें तो आप पाएंगे कि उनकी जो सारी कल्पनाएं हैं, वह खुशी और मौज मस्ती प्राप्त करने के आसपास ही होती है, भोग से जुड़ी हुई होती है 

आप कह सकते हैं की ख्याली पुलाव मैं हमेशा उस चीज के बारे में सोचते हैं जो उन्हें सुख प्रदान कर सके 

वै सिर्फ उस चीज़ के बारे में सोचते है जिनसे उन्हें सुख की प्राप्ति हो सके, चाहे वह शरीर से संबंधित सुख हो या इंद्रियों से प्राप्त होने वाला सुख वे हमेशा उसी चीज के बारे में कल्पना करेंगे या सोचेंगे 

ऐसे लोग कुछ योजना भी बनाते हैं तो वह यह जो योजना है वह ऐसी वस्तु प्राप्त करने के लिए होती है जो उन्हें सुख प्रदान कर सकें 

यदि उन्हें सुख प्राप्ति की उम्मीद नहीं है तो वह कुछ योजना भी नहीं बनाते और फिर यदि योजना बनाते हैं तो वह किसी भी तरह के दुख दर्द से दूर रहने की योजना बनाते हैं और उससे ऊपर उनका जो दिमाग है वह काम नहीं करता है, वही रहता है, इससे ऊपर वह कुछ और सोचने से काबिल नहीं है|  यह कुछ और सोच ही नहीं सकते|  

यदि आप भोग और सुख प्राप्ति के अलावा कुछ और बात करेंगे तो उन्हें नींद आ जाएगी 

यदि कुछ बहुत ही जटिल विषय पर आप बात करते हैं तो वह उसे समझ नहीं सकते क्योंकि ये लोग इतना सोचते ही नहीं है, उनका दिमाग इसके आगे काम करना बंद कर देता है|  

उनका जो दिमाग है वह या सुख प्राप्ति की चीजों से पूरी तरह से भ्रष्ट हो चुका है, दूषित हो चुका है और 

जैसे ही आप उनकी इच्छा पूर्ति के बारे में कुछ बात करेंगे तभी ये जाग जाएंगे और जहां पर भी सुख प्राप्त की बात है उस चीज में उन्हें बहुत आनंद आता है|  

ऐसे लोगों का कुछ लोग फायदा भी उठा सकते हैं क्योंकि इनमें बुद्धि की थोड़ी कमी होती है और इच्छाओं का जो बल बहुत अधिक होता है, इच्छाए बहुत प्रबल होती है और यह लोग अपनी इच्छा पूर्ति के लिए कुछ भी कर सकते हैं सुख प्राप्ति के लिए कुछ भी कर सकते हैं 

इसीलिए मैंने आपको चेतावनी दी थी कि मूल्यांकन करने का यह जो तरीका हम उपयोग कर रहे हैं, इसका दुरुपयोग संभव है और बहुत लोग करते भी हैं

कुछ लोग बहुत ज्यादा दुष्ट प्रवृत्ति के होते हैं या दयालु नहीं होते हैं, चालाक होते हैं, शातिर होते हैं और इसलिए वह दूसरों को बदलने का प्रयास करते हैं| 

वे इस तरह का मूल्यांकन करके, दूसरे को समझ के, दूसरे को जान के उनको अपने फायदे के लिए बदलने का प्रयास करते हैं जो की ठीक नहीं है| 

जिनकी भोगवृति की परत अधिक साक्रिय है, ऐसे लोग बहुत आसानी से उनके जाल में फंस जाते हैं 




यदि आप उनके सम्बन्धों का अवलोकन करें तो आप पाएंगे कि वह किसी के भी प्रति तब तक ही ईमानदार है जब तक उन्हें उस रिश्ते से सुख की प्राप्ति हो रही है, आनंद मिल रहा है, भोग मिल रहा है, कुछ आरामदायक मिल रहा है या उन्हें सुरक्षा मिल रही है या ऐसा कोई रिश्ता जो उनकी इच्छाओं की पूर्ति करें उनकी सारी जो जरुरतों को पूरा करें तो ही रिश्ता 

वह किसी भी व्यक्ति में रुचि नहीं रखता है, वह अपने आप में रुचि रखते हैं 

अपने आपके इच्छाओं की पूर्ति में और सुख प्राप्ति के चीजों में उनकी रूचि होती है 

उनका जो सम्बन्ध है वह सिर्फ सुख प्राप्ति का एक माध्यम मात्र है और यदि उन्हें कोई अच्छा माध्यम मिले तो  उस पर चले जाते हैं|  

आप पाएंगे कि ऐसे लोगों के अपने जीवन में बहुत सारे सम्बन्ध होते हैं क्योंकि वह किसी एक सम्बन्ध से संतुष्ट नहीं होते है और सम्बन्ध बदलते रहते हैं और 

यदि उन्हें कोई नया नहीं मिलता और पुराने सम्बन्ध में यदि उन्हें सुख प्राप्ति हो सके तो उसके पास भी चले जाते हैं
और वह उसके बारे में एकदम बेशर्म होते हैं, उनको कोई फर्क नहीं पड़ता, उन्हें सिर्फ अपने आप से मतलब है

यदि आप पुराने समय में देखें तो आप पाएंगे कि ऐसे लोगों की बहुत सारी पत्नियां होती है|  
ऐसे व्यक्ति बहुत सारी पत्नियां इसलिए नहीं रखता था ताकि वह समाज सेवा करना चाहते हैं या उन्हें भोजन देना चाहता है| यदि किसी व्यक्ति की बहुत सारी पत्नियां होती थी तो ऐसा माना जाता था कि वह बहुत ही सम्मानजनक है, 

लेकिन ऐसे व्यक्ति की बहुत सारी पत्नीयां उस के भोग का साधन बनती थी, सुख का साधन होती थी या फिर वो दास की तरह उनकी सेवा करती थी और उनके जो बच्चे थे वो भी उनके दास बन जाते थे और फिर वह उसके लिए काम करते थे 

ऐसे व्यक्ति कुछ ज्यादा काम नहीं करते हैं, फिर भी बहुत अमीर होते हैं और आप पाएंगे कि ऐसे व्यक्ति बहुत ज्यादा आराम पसंद होते हैं और अधिकांश समय खाने और सोने में व्यतीत करते हैं 

जिनको यह सब जीवन में नहीं मिलता है, वह लोग इसके पीछे दौड़ते हैं 

वे सोचते हैं कि शायद इसी में सुख मिलेगा और ऐसे लोग आपको आज के समय में भी मिलेंगे|  

उनके जो प्रेरणा स्रोत है वह भी इस तरह की वृति वाले ही लोग होंगे, जो हमेशा छुट्टियों पर रहते हैं, घूमते फिरते रहते हैं या हमेशा महंगे कपड़ों में लिपटे हुए रहते हैं| ऐसा दिखाते हैं कि मैं बहुत खुश हूं, बहुत आनंद में हूं|  

ऐसे लोग आपको किसी मैगजीन के कवर पर दिखेंगे या टीवी पर दिखाई देंगे या फिर इंटरनेट पर दिखाएंगे तो ऐसे लोग के लिए वे आदर्श होते हैं 

ऐसे लोग किसी भी व्यक्ति के प्रति ईमानदार नहीं होते हैं 

वह सब को धोखा ही देते रहते हैं| आप इन पर विश्वास नहीं कर सकते, 

उनके जो संबंध होते हैं वह लेनदेन पर आधारित होते हैं, आप मुझे इतना दीजिए, मैं आपको इतना दूंगा 
ऐसे लोग हमेशा अपनी तरह के लोगों के साथ मिलते जुलते मिलते हैं 

उनको अपने रक्त संबंधियों के प्रति अधिक आसक्ति नहीं होती है या ज्यादा उनसे मिलते जुलते नहीं है| ऐसा नहीं हैं की इनके लिए वो महत्वपूर्ण नहीं होते हैं| लेकिन यदि संबंधी, उन्हें कुछ पैसा दे, या कुछ चीजें दे, या ऐसा कुछ दे जिनसे उनके इच्छाएं पूरी हो सके तो ही वे अपने संबंध बनाए रखते हैं बाकी नहीं 

ऐसे लोग बहुत अच्छे दोस्त बनते हैं क्योंकि वे खुशी चाहते हैं| तो दोस्त अच्छे बनते हैं| यदि आप उनके जैसे हैं तो आपके बहुत अच्छे दोस्त बनेंगे 

माना कि जो उनकी दोस्ती है वह ऊपरी तौर पर ही होती है, फिर भी आपके जैसे यदि है या आपकी सोच उनसे मिलती है तो बहुत अच्छे दोस्त बन सकते हैं| पर यह आपको अगले ही पल छोड़ भी सकते हैं लेकिन जब तक यह दोस्त है तब तक वो अच्छे दोस्त बनते हैं, दिखावे के लिए भी होता है तब भी दोस्ती बहुत अच्छी होती है 


अगर ऐसा नहीं है तो वह आपसे जुड़ेंगे नहीं और आपसे आसक्त नहीं होंगे क्योंकि वह अपने आप को स्वतंत्र मानते हैं 

किसी भी तरह के उत्सव में, या किसी तरह के मिलन समारोह में, ऐसे लोगों ही संगति करना बहुत अच्छा होता है क्योंकि यह बहुत ज्यादा मनोरंजक होता है 

इनके पास बहुत कुछ कहने को होता है, बहुत ज्यादा मजाकिया होते हैं

बहुत अच्छे कपड़े पहनते हैं, सुंदर दिखते हैं, उनके पास कुछ नया दिखाने के लिए होता है

नई-नई चीजें होती है, नई घड़ी, नए कपड़े, नए मोबाइल और ऐसी बहुत सारी चीजें होती है इसलिए लोग इनके पास पाये जाते हैं और यह किसी समारोह में भी इसीलिए जाते हैं ताकि वहां पर कुछ दिखा सके इसलिए नहीं जाते क्योंकि यह सामाजिक है|  

क्यूंकि ये सुख प्राप्त करना चाहते हैं तो वह अपने शरीर को भी सुंदर रखते हैं, बहुत सुंदर होते हैं और इनका आकर्षण भी बहुत ज्यादा होता है 

यह कभी अपने शरीर को बीमार या खराब नहीं होने देते, मोटे नहीं होते

बहुत से लोग इनकी तरफ आकर्षित होते हैं क्योंकि ये अच्छे दिखते हैं, सुंदर दिखते हैं| 

ऐसे लोग जब बूढ़े होने लगते हैं तो अलग-अलग तरीके अपनाते हैं जिससे वो बूढ़े ना देखें और यह इस तरह की एक भ्रांति में पड़ जाते हैं कि मैं अभी तक बूढ़ा नहीं हुआ| जब वो बूढ़े होने लगते हैं तो उनका जो व्यवहार है वह बहुत ही अजीब सा हो जाता है|  





यदि आप उनके मनोरंजन के साधन देखें तो आप पाएंगे के सबसे महत्वपूर्ण जो चीज़ उनके लिए है, वह है संभोग और 
अगर वह यह नहीं कर रहा है तो वह ज्यादा भोजन करते हुए पाएं जायेंगे 

उन्हें स्वादिष्ट भोजन चाहिए होता है क्योंकि उन्हें जो साधारण भोजन है वह स्वादिष्ट नहीं लगता और उनको हमेशा नई चीजें चाहिए होती है, खाने के लिए तो ज्यादा स्वादिष्ट हो|  

ऐसे लोग भोजन के बहुत अच्छे उपभोक्ता होते हैं और ऐसा नहीं है की बहुत ज्यादा खाते हैं पर उन्हें स्वाद अच्छा चाहिए 

यह लोग हमेशा छुट्टी मनाने के लिए तैयार रहते हैं, कोई काम नहीं करना चाहते हैं क्योंकि यही उनके लिए मनोरंजन का साधन है तो वह घूमना बहुत पसंद करते हैं| 

उनके पास बहुत पैसा भी होता है इसलिए वह अपना सारा पैसा घूमने फिरने में खर्च कर सकते हैं 

उन के बहुत सारे दास और दासिया होते हैं क्योंकि वह काम नहीं करना चाहते हैं 

यह शराब और ड्रग्स के आदी हो जाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्हें उससे सुख की प्राप्ति होगी 

उनका दिमाग है और शरीर है, वह सुख प्राप्त करने और भोगों का आदि हो जाता है और 

बुढ़ापे में यदि वह बहुत अच्छे नहीं लगते हैं या उनके पास कोई और आय का साधन नहीं है तो सस्ते मनोरंजन के साधन है उसके आदि हो जाते हैं 

इस तरह की किताबें पढ़ते हैं या इस तरह की कहानियां सुनना पसंद करते हैं जहां पर सस्ता मनोरंजन है 

आप ऐसे लोगों के द्वारा पढ़ी जाने वाली किताबों का कवर देखकर ही उसको पहचान सकते हैं क्योंकि ऐसे लोगों के लिए बहुत सारी किताबें लिखी जाती है 

ऐसे लोग के लिए बहुत सारी पिक्चर भी बनाई जाती हैं जहां पर हर दूसरे दृश्य में कोई ना कोई शराब पीता हुआ दिखाई जाएगी या किसी भी तरह का बुरी आदत दिखाई जाएगी जैसे सिगरेट पीना शराब पीना ऐसे सारे जो दृश्य हैं वह इस तरह की पिक्चरों में बहुत ज्यादा होंगे या तो उसमें एक बहुत बड़ी कुछ कार होगी यहां पर बहुत सारी स्त्रियों को दिखाया जाएगा इस तरह की बहुत सारी चीजें उनसे संबंधित होंगे तो इस तरह का उनका मनोरंजन होता है जो काफी मनोरंजक होता है परंतु उससे ज्यादा कुछ नहीं 


विकार 
अपने भोग की प्राप्ति के लिए, सुख भोग के लिए वह कुछ भी कर सकते हैं, झूठ भी बोल सकते हैं और इतना झूठ बोलते हैं कि कभी उसका अंत नहीं होता और अपने जो के साधन है उन को बनाए रखने के लिए झूठ बोल सकते हैं

ऐसे लोग बेईमान भी होते हैं और भ्रष्ट होते हैं वह सब कुछ करेंगे जिससे उनका काम चलता रहे 

वे अपनी इच्छाओं की पूर्ति करने के लिए बल का भी प्रयोग करते हैं या हिंसा का प्रयोग करते हैं 

क्योंकि यहां पर विकार आ गया है तो इनकी कामवासना भी थोड़ी सी विकृत हो जाती है इसलिए यह लोगों को प्रताड़ित भी कर सकते हैं और अपने लिए ही किसी को मार भी सकते हैं और 

अपने लिए कोई अपराध भी कर सकते हैं 

यदि किसी को पता चल जाए तो उस व्यक्ति को मार भी सकते हैं तो अपराध को छुपाना चाहते हैं 

ऐसे लोगों को बहुत सारी चीजों की लत लग जाती है 
हर चीज उनके लिए लत ही होती है जैसे साबुन, परफ्यूम, मेकअप, अल्कोहल, भोजन  सब कुछ 

मानसिक विकार होने पर ऐसे लोग झूठ बहुत बोलते हैं | 

कभी-कभी इनके पास इतना पैसा नहीं होता है कि यह अपना जीवन का स्तर बनाए रख सके तो फिर ऐसे लोग आत्महत्या की तरफ बढ़ते हैं| 

पशुवृत्ति का व्यक्ति अपने आप को कभी भी नहीं मारेगा लेकिन ऐसे लोग अपने आप को मार सकते हैं और इन से भी ज्यादा जो आत्महत्या करने वाले जो लोग हैं वह भावनात्मक परत पर होते हैं भाव वृद्धि की परत पर होता है क्योंकि इनको जो सुख भोग है वह बहुत अधिक चाहिए होता है तो इसकी इनके लिए जो दुख है वह भी बहुत अधिक होता है

एक आम आदमी जितना दर्द या दुख महसूस नहीं करेगा उससे कई गुना अधिक इस परत पर होने वाले लोग उसका अनुभव करते हैं 

एक बहुत छोटी सी चीज भी उनके लिए बहुत दुख पैदा कर सकती है, वो इनके लिए बहुत बड़ी बात हो जाती है बहुत बड़ा धक्का लगने वाली जैसी बात होती

आप सोच रहे होंगे कि ऐसे बहुत से लोग हैं जिनको मैं जानता हूं जो इस तरह की व्रती दर्शाते हैं और आप सही कह रहे हैं क्योंकि अधिकांश जो मनुष्य हैं वह और कुछ नहीं सिर्फ भोगव्रती की परत पर ही है 

तो यदि आप इस परत पर पाए जाते हैं तो जो समाज है वह आपको एक पुरस्कार देगा क्योंकि अधिकांश लोग ऐसे ही हैं 

क्योंकि आपके पास घर है, भोजन है, पैसा है, और अब आप भोगव्रती में लिप्त हैं, सुख भोग में लगे हुए हैं तो लोग उसकी प्रशंसा करेंगे और वह कहेंगे कि इसमें कुछ गलत नहीं है, सब कुछ सही तो है|  

आपको ऐसे लोग हर जगह मिलेंगे जैसे अखबार हो, टीवी हो, या किसी भी तरह के विज्ञापन हो, हर जगह आपको यही सब कुछ मिलेगा क्योंकि उस व्यक्ति को जो सुख मिले हैं वह हमारे समाज के लिए एक आदर्श है 

ऐसा क्यों है क्योंकि अधिकांश लोग जो है पशुवृत्ति से प्रगति करते हुए इस परत पर आये हैं इसीलिए जो अधिकांश लोग हैं वह उसे सफलता का मापदंड मान लेते हैं 

इस परत पर कुछ अच्छी चीजें है, सुख हमेशा बुरा नहीं होता और दुख दर्द को हटाना या दूर रखना भी बुरा नहीं है 

लेकिन यदि इसके अलावा आपके जीवन में और कुछ नहीं हो रहा है तो फिर आप निश्चित रूप से कह सकते हैं कि आप भोगवृत्ती या उससे नीचे के परत पर अटक गए हैं 

आप उससे आगे प्रगति नहीं कर रहे हैं तो क्या किया जा सकता है? 
ऐसे व्यक्ति, जो निचली परतो पर है को यह नहीं पता हो सकता लेकिन ऊपरी प्रति व्यक्ति बता सकते हैं कि निचली परतो में क्या किया जा सकता है
 
ऊपरी परतों के लोग अपने से नीचे की परतों में सब कुछ नियंत्रित कर सकते हैं 

तो इसलिए नीचे की परतों के लोग स्वयं से प्रगति नहीं कर सकते हैं 

तो अगर आप ऐसे लोगों को बोलेंगे कि देखो इस तरह का व्यवहार ठीक नहीं है तो वे बोलेंगे कि क्यों? क्या बुराई है अच्छा दिखने में? क्या बुराई है अच्छा खाने में? अच्छा पहनने में? अच्छे से रहने में? या फिर लड़कियां मुझे पसंद करती हैं इसलिए तुम मुझसे जलते हो, इसीलिए तुम मुझे रोकने के लिए ये सब कह रहे हो 

परेशानी यह है कि यह सब एक दिन समाप्त हो जाएगा और उसके बाद जो परिवर्तन होगा उससे आप कैसे निपटेंंगे?  

जैसा कि चंद्रमा 15 दिन बढ़ता है और फिर 15 दिन घटता है तो जब बुरा वक्त आता है तो इन लोगों को बहुत दुख का सामना करना पड़ता है और जो दुख है वो उनको ऊपर की तरफ ले जाता है नहीं तो और कुछ नहीं देखेंगे 

और वहां पर भी कुछ लोगों को यह मौका मिलता की वे प्रगति करे बाकी सब तो सिर्फ दुख से भागने का प्रयास करते हैं|  वह चाहते हैं कि यहां पर सब ठीक कर दिया जाए जबकि वह पहले से ही सब कुछ बिगड़ चुका होता है 

तो अगर आपको लगता है कि आप स्वयं इस परत पर है तो परेशान होने की आवश्यकता नहीं है 

यह बदला जा सकता है| जब समय सही हो, जब परिस्थितियां सही हो जाए और सारी इच्छाएं पूरी होती है, तो उस समय प्रगति हो जाएगी उसकी चिंता करने की आवश्यकता नहीं है और यह मनुष्य होने का एक भाग है 

परंतु यदि यही सब चल रहा है तो फिर आपको सोचने की आवश्यकता है कि कैसे इस से बाहर निकला जाए 

ऐसे लोगों के लिए कुछ मार्ग का सुझाव दिया जा सकता है जिसमें सबसे पहले आता है 
भक्ति मार्ग क्योंकि ऐसा व्यक्ति भक्ति को अपने सुख का साधन मान सकते हैं और फिर उनके जो सांसारिक सुख हैं वो धीरे धीरे छूट जाएंगे और 

यह किसी धार्मिक संस्थान से भी जुड़ सकते हैं जो उन्हें पसंद हो और ऐसी जीवनशैली अपनाएं जो उस धर्म के द्वारा बताई गयी हो जैसे बहुत ज्यादा मत खाइए, शराब मत पीजिये, एक से ज्यादा साथी मत रखिए या ब्रह्मचर्य का पालन करिए तो यह सब चीजें धर्म हमें सिखाता है और यह ऐसे ही लोगों के लिए बना है और इसीलिए कोई धार्मिक संस्थान से जुड़ने का सुझाव दिया जाता है लेकिन आज के समय में यह थोड़ा गलत भी हो सकता है क्यूंकि धार्मिक संस्था के नाम पर पाखंड बहुत फ़ैलता है तो थोड़ा बुद्धिमानी से तय करना चाइये की किस संसथान से जुड़ रहे हैं   

कुछ लोगों के लिए कर्म योग की सलाह भी दी जाती है क्योंकि यह बहुत ही आलसी होते हैं और काम नहीं करना चाहता है तो थोड़ी बहुत जो सेवा है उसका सुझाव दिया जाता है और उसको करके सुख प्राप्त कर सकते हैं और धीरे-धीरे दूसरों की सेवा करना अधिक सुखदायक हो जाता है 

अपने आप की इच्छा पूर्ति करने से ज्यादा या अपने स्वार्थ की पूर्ति से ज्यादा अच्छा हो जाता है दूसरों की सेवा करना और वह फिर प्रगति का मार्ग बनता है 

यदि कोई इस परत पर है तो उनकी प्रगति बहुत जल्दी नहीं होती है|  एक पशुवृत्ति वाला मनुष्य जल्दी प्रगति कर लेता है परन्तु भोग व्रती की परत से जल्दी प्रगति नहीं होती क्योंकि यहां पर आकर्षण बहुत ज्यादा है और सूख बहुत ज्यादा हैं इसलिए किसी के भी पास से ऊपर जाने का कोई महत्वपूर्ण कारण नहीं होता है| क्यूंकि वो सुखी है और सब कुछ ठीक है तो वहीं पर अटके रह जाते हैं

यदि इच्छा बहुत ज्यादा है तो तंत्र मार्ग का भी सुझाव दिया जाता है जहां पर इच्छा बहुत जल्दी पूरी हो जाती है और फिर जो बचा हुआ जीवन है वह सब कुछ ठीक करने में निकल जाता है 

तंत्र मार्ग क्या करता है की एक बहुत ही जल्दी मिलने वाली जो संतुष्टि है वह प्रदान करता है और बहुत तुरंत मिलने वाली सुख प्रदान करता है और हम जानते हैं बहुत अच्छे से कि एक बार जब सुख मिल जाता है तो जो मनुष्य है वह उससे ऊब जाता है अगर वह बहुत जल्दी मिल जाए और हर जगह वह एकदम धूल मिट्टी की तरह उपलब्ध हो तो कोई भी व्यक्ति उसको नहीं चाहेगा 

हम वह चाहते हैं जो किसी के पास ना हो और जो तंत्र मार्ग आपको सब कुछ देता है और इसलिए आपकी जो भी इच्छा है वह बहुत जल्दी समाप्त हो जाती है, किसी भी तरह की सुख से बोरियत हो जाती है और फिर उनके सामने एक खालीपन की स्थिति आ जाती है और फिर यही खालीपन उनके आगे की परतो की तरफ जाने का रास्ता दिखाती हैं और 

परंतु जो मार्ग है वह व्यक्ति के ऊपर निर्भर करता है, प्रत्येक व्यक्ति को किस तरह का मार्ग से जाया जाए वो गुरु पर निर्भर करता है उनको और किसी तरह के योग का सुझाव भी दिया जा सकता है 

जहां पर सब कुछ थोड़ा सा सामान्य, बहुत ज्यादा जटिल ना हो तो सामान्य से प्रक्रिया है जो अष्टांग योग के कुछ साधन है कुछ अंग है उनको उनका सुझाव दिया जा सकता है|  प्रत्याहार तक जो इंद्रिय सुख है उनको उनसे बचने का सुझाव और यह गुरु ही सिखा सकते हैं एक बहुत दृढ़ संकल्प बनाने की जरूरत है ताकि अपनी ऊर्जा है उसको सुख भोग में व्यर्थ ना करें तो 

अब आपको जो योगिक क्रियाएं हैं उनके पीछे की का कारण समझ आ रहा होगा कि क्यों ऐसी चीजों को करने से रोका जाता है ताकि एक व्यक्ति का चित् जो है वह अनुशासित हो 

यह सब के लिए नहीं है यह सिर्फ उस व्यक्ति के लिए हैं कुछ और कार्य नहीं करता है इसलिए बलपूर्वक उसे रोकने का प्रयास किया जाता है|  

उसके पास यह सब करने का कोई कारण नहीं होता या तो उनके जीवन में कुछ ऐसा घटित होता है जिससे उन्हें लगता है कि यहां पर कुछ ठीक नहीं है तभी वह आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं या तो उनके जीवन में कोई मर गया हो या उनका कोई साथी मर गया हो या फिर वह बूढ़े हो रहे हो और मृत्यु को अपने सामने खड़े देखते पा रहे हो और उन्हें नहीं पता हो की इससे बाहर कैसे निकलना है तभी एक चेतना जागृत होती है तभी वह सोच पाते कि हां अब मुझे इससे आगे बढ़ना है तब वह सोचते हैं कि अब मुझे यहां पर कुछ संतुलन की आवश्यकता है 

तभी वह किसी गुरु के पास जाएंगे और गुरु उन्हें कुछ योगिक साधनाएं बता सकते हैं और 

लोगों के बहुत सारे जीवन इसी परत पर व्यतीत हो जाते हैं | उनका कारण शरीर को अभी अभी इस परत  पर भेजा गया है जो मनुष्य का शरीर है 

गुरु को यह पता होता है कि कैसे इस व्यक्ति को इस परत से आगे ले जाना है पर इसमें समय लग सकता है और 

यदि आप किसी ऐसे समय में पैदा हुए हैं जहां पर जो सुख भोग है, वह हर जगह है, तो फिर और ज्यादा समय लग सकता है आप हजारों सैकड़ों जन्म इस परत  पर व्यतीत कर सकते हैं 

सब कुछ खराब या अंधकारमय नहीं है और उनका भविष्य भी है पर ये जो यात्राएं है वो थोड़ी लंबी हो सकती है



Friday, May 5, 2023

आत्ममूल्यांकन भाग -२

पिछली बार हमने आत्ममूल्यांकन क्या है, इसे क्यों करना चाहिए और उससे सम्बंधित चेतावनियों के बारे में चर्चा की थी| अब सवाल यह है कि इसका मापन या मूल्यांकन कैसे किया जाए? आप अपनी प्रगति को कैसे मापेंगे? तो, हम एक विधि लेकर आए। यह विधि परतों की सापेक्ष गतिविधि पर आधारित है। जितना अधिक विकसित साधक होगा, उतनी ही परतों की गतिविधि संतुलित होगी और विकसित साधक उच्च अवस्थाओं को पसंद करेंगे। अब अगर आप सोच रहे हैं कि यह गतिविधि क्या है? ये परतें क्या हैं? मैं किन अवस्थाओं की बात कर रहा हूं? अतः ध्यान दें कि मैं सापेक्ष गतिविधि के बारे में बात कर रहा हूँ। कोई पूर्ण गतिविधि नहीं है। परत की गतिविधि का कोई पूर्ण माप नहीं है। आपको यह पता लगाना होगा कि अन्य परतों की तुलना में कौन अधिक या कम सक्रिय है। यही हम करने जा रहे हैं और निश्चित रूप से यह उपाय मनमाना और व्यक्तिनिष्ठ है| आप अपने खुद के उपायों का उपयोग भी कर सकते हैं शायद आपके पास इससे बेहतर कुछ हो| मैं इसे किसी ऐसी चीज पर आधारित कर रहा हूं जो बहुत ही मौलिक है। यह सब मनमाना है और यह बहुत सामान्य है। हर कोई अद्वितीय है लेकिन हम इस सामान्य तरीके को लागू करते हैं जिसे हमने मनमाने ढंग से चुना है क्योंकि मुझे यह पसंद आया। इस तरीके को चुनने के पीछे कोई और कारण नहीं है, कोई तर्क और तार्किकता नहीं है। अब आप पाएंगे कि मैं निचली परतों और ऊपरी परतों के बारे में बात करने जा रहा हूं और मैं किसी ऐसे व्यक्ति की घोषणा करने जा रहा हूं जो अधिक ऊँचा या कम विकसित है लेकिन आप पाएंगे कि सभी परतें हमेशा सक्रिय रहती हैं अन्यथा जीवन संभव नहीं है।

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितने विकसित हैं निचली परतें भी सक्रिय हैं और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई कितना नीच है उच्च परतें वे किसी बिंदु पर सक्रिय होती हैं या शायद नींद में जो जानती हैं लेकिन हर कोई इस परतों को प्राप्त कर चुका है

मैं किसी भी छिपी हुई बात के बारे में बात नहीं कर रहा हूं|

यहाँ यह कुछ ऐसा है जो बहुत स्पष्ट है मैं किसी भी तत्वमीमांसा के बारे में बात नहीं कर रहा हूँ|

यह ज्यादातर सामान्य ज्ञान है जो किसी भी बुद्धिमान व्यक्ति को पहले से ही पता होना चाहिए कि उनके पास पहले से ही यह ज्ञान है इसलिए जब मैं कहता हूँ कि ये परतें कम हैं और वे उत्पादन कर रहे हैं इस तरह की नीच गतिविधि और आप पाते हैं कि ओह, मेरे पास यह गतिविधि है, मैं भी इसे करता हूं, इससे घबराने की कोई जरूरत नहीं है, हर किसी के पास सभी परतें हैं अन्यथा संरचना कार्यात्मक नहीं होगी

जितनी भी परतें हैं उन्हें सात समूहों में बांटा गया है जो बहुत ही परिचित समूह हैं और आप देख सकते हैं कि वे 24 घंटों में गतिविधि के मामले में बदलते हैं और वे जीवन भर बदलते रहते हैं साथ ही वे हर साल हर महीने और हर साल बदलते रहते हैं सप्ताह।

यह सिर्फ एक प्रदर्शन है। अधिक विकसित व्यक्ति जितना अधिक संतुलित होगा गतिविधि होगी और यह ज्यादातर समय एक समान होगी क्योंकि हमारी प्रवृत्ति उच्च अंत में रहने की है निचली गतिविधियों में कम समय लगेगा लेकिन वे सक्रिय होंगी हमने माप को चुना है और अब हमें कुछ मापदंडों को चुनने की आवश्यकता है क्योंकि गतिविधि विभिन्न प्रकार के भावों के संदर्भ में दिखाई देगी आप केवल स्तरित संरचना को खोलकर अवलोकन शुरू नहीं कर सकते गतिविधि यह गैर-भौतिक गैर-मौखिक गैर-सामयिक गैर-विशेष है आप इन सभी चीजों को जानते हैं आप उस पर एक मीटर नहीं लगा सकते हैं|

आप केवल इन गतिविधियों की अभिव्यक्ति का निरीक्षण कर सकते हैं दुर्भाग्य से यह संभव है क्योंकि यह वही है जो पूरे के माध्यम से व्यक्त किया जा रहा है इस पूरे अस्तित्व को हम एक मानव कहते हैं कि यह गतिविधि कैसे व्यक्त की जा रही है और आप बहुत तार्किक रूप से देखेंगे कि गतिविधि व्यवहार के रूप में प्रकट होती है, यह वाणी और विचार के रूप में प्रकट होती है और यह आपके परिचित व्यक्ति के चरित्र में प्रकट होती है,

यह दुखों के रूप में भी प्रकट होती है या विभिन्न प्रकार के विकृति विकार इसलिए मैंने परतों की गतिविधि सापेक्ष गतिविधि को मापने के लिए यहां छह पैरामीटर चुने हैं वे व्यवहार भाषण विचार संबंध उस व्यक्ति के मनोरंजन के साधन और मानसिक कष्ट हैं

जिन्हें आप कुछ और जोड़ सकते हैं जैसे कि की स्थिति शरीर और व्यक्ति की वित्तीय स्थिति वगैरह, लेकिन यह बहुत जटिल हो जाता है, मैंने यहां केवल सबसे महत्वपूर्ण मापदंडों को लिया है और यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि हमें इन चीजों का अनुमान नहीं लगाना चाहिए, हमें केवल यह नहीं मान लेना चाहिए कि इस व्यक्ति के पास होना चाहिए उस तरह का व्यवहार या हमें केवल दो शब्दों या व्यक्ति के नाम से यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि उसकी सोच क्या होगी या उसके संबंध क्या होंगे जैसे कि जाति या जाति या लिंग जैसी चीजों से निष्कर्ष नहीं निकालते हैं जो हमेशा मूर्खता का उपयोग करते हैं

आपके प्रत्यक्ष अनुभव और तर्क व्यक्ति का अध्ययन करते हैं या आपके मामले में स्पष्ट रूप से आप उन भ्रष्ट मापदंडों का उपयोग नहीं कर सकते हैं जो समाज आमतौर पर आप पर उपयोग करता है आप यह नहीं कह सकते कि मैं इस समुदाय या इस जाति या इस भाषा समूह से संबंधित हूं और इसलिए मैं बस खुद को नियुक्त करूंगा विकास के उच्चतम स्तर पर और मेरा रास्ता अब समाप्त हो गया है मेरा विकास अब पूरा हो गया है स्पष्ट रूप से यह पूरी तरह से बेकार होगा इसलिए इसे अप्रत्यक्ष अनुभव और तर्क होना चाहिए यह एक अनुमान नहीं हो सकता है

आपको एक टेलीफोन कॉल के आधार पर लोगों का न्याय नहीं करना चाहिए उदाहरण के लिए आपको उन्हें देखने की आवश्यकता है जिस व्यक्ति के साथ आपको समय बिताने की आवश्यकता है, वास्तव में कुछ महीने और कम से कम एक वर्ष उनके साथ बिताएं, इससे पहले कि आप किसी का मूल्यांकन करना शुरू करें और जाहिर है कि आपको अपने बारे में किसी तरह के निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले खुद को लंबे समय तक देखना चाहिए और परतें कई हैं लेकिन हम सुविधा के लिए उन्हें केवल सात प्रकारों में समूहित करते हैं आप उन्हें 10 प्रकारों या 15 प्रकारों में समूहित कर सकते हैं यह आपकी इच्छा है यह सब मनमाना और व्यक्तिपरक है तो चलिए शुरू करते हैं

Thursday, April 20, 2023

आत्म-मूल्यांकन - परिचय

कई बार हमारे मन में यह सवाल आता है कि: 

कैसे पता करें कि मैं सही मार्ग पर हूं या नहीं? कैसे पता चलेगा कि मैं आगे बढ़ रहा हूँ या नहीं ? क्या मैं धीरे चल रहा हूँ या बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा हूँ? आध्यात्मिक प्रगति के क्या संकेत हैं? क्या मुझे इस मार्ग पर कई बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है? वे बाधाएँ क्या हैं? और क्या मैं सही मार्ग पर हूं या मुझे अपना मार्ग बदलने की जरूरत है? और इसी तरह के कई प्रश्न होते है, जिनके उत्तर जानने का प्रयास एक साधक कर रहा है..


ये प्रश्न इसलिए हैं क्योंकि साधक अपनी स्वयं की प्रगति को जाँचने में सक्षम नहीं है। साधारणतः इन प्रश्नों का जो उत्तर दिया जाता है, वह यह है कि यदि आपके मन की शांति निरंतर बढ़ रही है, यदि आप खुशी और आनंद का अनुभव करते है और यह बढ़ रहे है और आपकी स्वतंत्रता बढ़ती जा रही है तो आप सही मार्ग पर हैं| आप जो कर रहे है वो बिल्कुल ठीक है, इसे करते रहिये।


प्रगति जाँचने का, यह एक सामान्य और बहुत अच्छा मापदण्ड है| अधिकांश लोगों के लिए यह काफी अच्छा है परन्तु, कभी-कभी हमारी रूचि कुछ विशेष चीजे जानने में होती है। वैसे तो जो मैं हूं, वह प्रगति नहीं कर सकता, वह पहले से ही सर्वोच्च है, परम है। पर जो प्रगति कर रहा है वह कुछ और ही है और अब तक आपने अनुमान लगा लिया होगा कि वो यह जीव है, यह मशीन है जो प्रगति कर रही है, यह विकसित हो रही है, स्मृति की परतों से जो संरचना बनी है, वो एक दिशा में विकसित हो रही हैं, तो यहाँ प्रगति से मेरा अभिप्राय है, जीव की प्रगति से है, यह मेरी प्रगति नहीं है।


तो  इस चर्चा के लिए हम माया में थोड़ा नीचे उतरते हैं और कह सकते कि "साधक" की प्रगति, या आपकी प्रगति या मेरी प्रगति। हम यहाँ जिस सत्य की चर्चा करेंगे वो सापेक्षिक सत्य हैं और हम इस प्रगतिशील मार्ग को स्वीकार करते हैं, कि माया द्वारा रचित यह संरचना विकास के मार्ग पर हैं, पर हम यह पूरी तरह से जानते है कि मैं पहले से ही हर तरह से परिपूर्ण और आनंदित हूँ। हम माया में उतरने जा रहे हैं और यहाँ हम इस मनुष्य जीव रूपी संरचना को देखेंगे। हम जानेंगे कि यह कैसे विकसित होता है? यह कैसे आगे बढ़ता है? तो हम व्यक्ति विशेष के गुणों के बारे में चर्चा करेंगे और हर चीज़ को बहुत विस्तार से जानेंगे।


जब हम अपनी प्रगति का जाँचते है तो हम इसे "आत्म-मूल्यांकन" कहते हैं जो आध्यात्मिक पथ पर हमारी अपनी प्रगति का निर्णायक  है। यह उन लोगों के लिए जरूरी है जो प्रगतिशील मार्ग पर हैं। जो ज्ञान मार्ग पर हैं, यह उनकी रुचि पर निर्भर करता है|  क्यूंकि ज्ञानमार्ग एक सीधा मार्ग है, इसलिए आप आत्ममूल्यांकन छोड़ भी सकते हैं क्योंकि ज्ञानमार्गी के लिए यह समय की बर्बादी ही होगी।


तो शुरू करते है पहले प्रश्न से कि हम आत्म मूल्यांकन क्यों करते हैं?

यह देखने के लिए कि हम कैसे प्रगति कर रहे हैं और यह पता लगाने के लिए कि हम कितनी तेजी से प्रगति कर रहे हैं| किसी भी त्रुटि को ठीक करने के लिए भी हम आत्ममूल्यांकन कर सकते है|  यदि हम प्रगति नहीं कर रहे हैं, तो कोई त्रुटि या कोई बाधा अवश्य होगी। यदि हम प्रगति नहीं कर रहे हैं तो हम अपना मार्ग बदलने, गुरु बदलने, परंपरा बदलने आदि का निर्णय ले सकते हैं और आप यहाँ स्पष्ट लाभ देख सकते हैं कि यदि हम अपनी प्रगति का मूल्यांकन करते हैं तो हमारा बहुत समय बच जाता है। यह एक कला है और अब हम इसे सीखने जा रहे हैं।


जैसे हम आत्म मूल्यांकन करंगे हैं, उसी विधि का उपयोग कर हम दूसरों का मूल्यांकन भी कर सकते है। हम उसी प्रक्रिया का उपयोग यह तय करने के लिए कर सकते हैं कि दूसरे कैसे प्रगति कर रहे हैं, उनके विकास का स्तर क्या है और इसी से सम्बंधित प्रश्नों का उत्तर प्राप्त कर सकते है..


जाने अनजाने हम वैसे भी दूसरों का मूल्यांकन करते ही है। उदाहरण के लिए- जैसे ही हम किसी व्यक्ति से मिलते हैं, हमारे अंदर एक स्वाभाविक प्रक्रिया चलती है और हम उस व्यक्ति का मूल्यांकन करना शुरू कर देते हैं, आप कह सकते है की दूसरों का मूल्यांकन अपने आप हो जाता है। हम उन्हें उनके व्यवहार के आधार पर आंकते हैं, उन्होंने क्या पहना है? उनके कपड़े, उनके जूते, वे कैसे बोलते हैं? वे किस राष्ट्रीयता, जाति, धर्म के हैं? उनकी शिक्षा क्या है, उनकी आर्थिक स्थिति क्या है? वे सुंदर हैं या कुरूप हैं? और इसी तरह के और भी कई प्रश्न होते है| मनुष्य का विकास ही इस प्रकार से हुआ है की वो बहुत जल्दी दूसरों का आंकलन करने लगता है। उत्तरजीविता के लिए  इसका बहुत लाभ है। उदाहरण ले लिए - क्या यह शख्स मेरा दुश्मन है या दोस्त है? क्या यह व्यक्ति एक उपयुक्त साथी है या नहीं? ऐसे कई दिलचस्प प्रयोग किये गए थे जिनके बारे में आपको इंटरनेट से जानकारी मिल सकती हैं|  ये सभी प्रयोग यह मापने की कोशिश करते हैं कि हम कितनी तेजी से निर्णय लेते हैं कि क्या दूसरा व्यक्ति संभोग के लिए एक उपयुक्त साथी है या नहीं|  इन प्रयोगों में पाया गया कि यह निर्णय लेने में केवल कुछ ही सेकंड लगते हैं और व्यक्ति हाँ या ना के उत्तर पर पहुँचें जाता है। मैं इस व्यक्ति के साथ कोई सम्बन्ध बनाऊंगा या नहीं ? इसका निर्णय लेने में सिर्फ कुछ सेकंड लगते हैं और हमें पता भी नहीं चलता कि ऐसा हो चुका है। निर्णय तो पहले ही हो चुका होता है बाद में तो हम बस उसका पालन करते हैं।


तो, दूसरे व्यक्ति का मूल्यांकन हमारे नियंत्रण के बिना स्वतः ही हो जाता है लेकिन यह व्यवस्थित और चेतनापूर्वक किया जा सकता है। एक बार जब आप अपने आप को जान जाते हैं, एक बार आप जान जाते हैं कि यह संरचना कैसे काम करती है, यह मशीन कैसे काम करती है, तो आप सभी लोगों को जानने में सक्षम होंगे क्योंकि सभी संरचनाएं समान है। बहुत थोड़ा सा अंतर होता हैं लेकिन ज्यादातर लोग एक जैसे ही हैं। 


वास्तव में एक बार जब आप किसी को पूरा जान लेते हैं, तो आप उनमें कुछ हेरफेर कर सकते हैं, आप उन्हें नियंत्रित कर सकते हैं|  दूसरों का मूल्यांकन करने की इस क्षमता का दुरुपयोग भी किया जा सकता हैं। आप जांच सकते हैं कि वह व्यक्ति कितना विकसित है और फिर आप अपना व्यवहार बदल सकते है या आप दूसरे व्यक्ति में बदलाव करने का निर्णय ले सकते हैं, इसलिए यहाँ मुझे आपको यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि आध्यात्मिक स्तर या विकास के स्तर का मूल्यांकन करने की इस क्षमता का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए। आप इसे दूसरों पर इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन यह आपके अपने मूल्यांकन के लिए है|  जब तक दूसरे अनुमति ना देवें तब तक उनका मूल्यांकन नहीं करना चाहिए। 

जब आप स्वयं पर्याप्त प्रगति कर लेंगे और आपको रुचि रखने वाले साधक मिलेंगे जो जानना चाहेंगे कि आप कैसे प्रगति कर रहे हैं? वे जानना चाहेंगे कि वे स्वयं कैसे और क्या कर सकते हैं जिससे आपके जितनी तेजी से प्रगति कर सके| तब आप उन्हें यह बताकर उनकी मदद कर सकते हैं कि आत्म-मूल्यांकन कैसे करें| आप बहुत समय तक उनका अवलोकन करने के बाद भी ऐसा कर सकते हैं। आपको पता चल जाएगा कि हर इंसान में विकसित होने की, प्रगति करने की समान क्षमता होती है बस सब एक ही स्तर पर नहीं होते है। यह एक कड़वा सच है और लोग इसे छिपाने की कोशिश करते हैं परन्तु आपको इसको छिपाने की जरूरत नहीं है। आप इसे स्वीकार कर सकते हैं, आप सभी को वैसे ही स्वीकार कर सकते हैं जैसे वे हैं। शर्मिंदा होने की कोई जरूरत नहीं है, राजनीतिक रूप से सही होने की कोई जरूरत नहीं है, खासकर तब, जब आप अपने जीवन के बारे में फैसला करते हैं| जब आप अपने जीवनसाथी या दोस्तों या यहां तक कि अपनी नौकरी के बारे में फैसला करते हैं तो मूल्यांकन बहुत उपयोगी है लेकिन इसका दुरूपयोग नहीं किया जाना चाहिए। लोगों से भेदभाव करना, मूल्यांकन की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा और वह मूर्खता है।


मुझे आपको यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि लोगों ने इस तरह का सामाजिक प्रयोग किया है और उन्होंने विकास के स्तर के आधार पर लोगों के साथ भेदभाव करके पूरी सभ्यताओं को नष्ट कर दिया। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई कितना विकसित है, सभी के साथ समान व्यवहार करने की आवश्यकता है| मुझे इसे दोहराना चाहिए इसलिए यहां कुछ चेतावनियां दी जा रही हैं। 

यह तरीका जिसकी हम अभी चर्चा करने जा रहे हैं, 100% सटीक नहीं है और हर किसी पर काम नहीं करेगा  क्योंकि ये मानसिक संरचनाएं बहुत जटिल हैं और ये 24 घंटे में हर समय बदलती रहती हैं। सभी संरचनाएं एक चक्रीय परिवर्तन से गुजरती हैं, ये वार्षिक रूप से एक चक्रीय परिवर्तन से गुजरते हैं और इनकी प्रगति होती है जो कुछ सप्ताहों से लेकर कई वर्षों में होती है।


तो आज आप किसी का मूल्यांकन कर सकते हैं और आप पाएंगे कि एक हफ्ते के बाद ही कुछ बदलाव हो गए हैं। शायद वह किसी से मिला हो, शायद उसने कोई दूसरी किताब पढ़ी हो, शायद उसके अंधविश्वास को किसी गुरु ने नष्ट कर दिया हो और इसी तरह की कई बातें हो सकती है|  वह अब पूरी तरह से अलग व्यक्ति है या शायद उसके परिवार में कोई मृत्यु हो गई है या वह किसी से प्यार करने लगा है, या शादी कर ली है या किसी ने उसे छोड़ दिया है, पहले वह एक खुशमिजाज व्यक्ति था, अब वह एक टूटे हुए रिकॉर्ड की तरह है और इसी तरह कुछ भी हो सकता है| 


इसलिए मूल्यांकन का परिणाम बदलता रहता है और आपका यह कभी स्थायी नहीं हो सकता है। आप बड़े रूप से एक समग्र मूल्यांकन कर सकते हैं, जो जीवन भर में बहुत अधिक नहीं बदलता है और इसप्रकार आप अन्य लोगों की और स्वयं की समस्याओं का निवारण कर पाएंगे| किसी भी तरह का इलाज करने का प्रयास न करें। आप एक मनोचिकित्सक नहीं हैं, इसलिए यह किसी भी प्रकार की चिकित्सा या उपचार का विकल्प नहीं है। यदि ऐसी परिस्थिति हो तो किसी विशेषज्ञ से सलाह लेंवे और अगर आपको लगता है कि आप प्रगति नहीं कर रहे हैं तो कोई भी बड़ा निर्णय लेने से पहले अपने गुरु से सलाह लें।

जातिवृत्ति

विकास क्रम की सीढ़ी पर अब हम तीसरे स्तर पर पहुंच चुके हैं, जिसे हमने कहा है जातिवृत्ति|  यह परत भोगवृति की परत से ऊपर आती है|  ऐसे व्यक्ति ...