Thursday, April 20, 2023

आत्म-मूल्यांकन - परिचय

कई बार हमारे मन में यह सवाल आता है कि: 

कैसे पता करें कि मैं सही मार्ग पर हूं या नहीं? कैसे पता चलेगा कि मैं आगे बढ़ रहा हूँ या नहीं ? क्या मैं धीरे चल रहा हूँ या बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा हूँ? आध्यात्मिक प्रगति के क्या संकेत हैं? क्या मुझे इस मार्ग पर कई बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है? वे बाधाएँ क्या हैं? और क्या मैं सही मार्ग पर हूं या मुझे अपना मार्ग बदलने की जरूरत है? और इसी तरह के कई प्रश्न होते है, जिनके उत्तर जानने का प्रयास एक साधक कर रहा है..


ये प्रश्न इसलिए हैं क्योंकि साधक अपनी स्वयं की प्रगति को जाँचने में सक्षम नहीं है। साधारणतः इन प्रश्नों का जो उत्तर दिया जाता है, वह यह है कि यदि आपके मन की शांति निरंतर बढ़ रही है, यदि आप खुशी और आनंद का अनुभव करते है और यह बढ़ रहे है और आपकी स्वतंत्रता बढ़ती जा रही है तो आप सही मार्ग पर हैं| आप जो कर रहे है वो बिल्कुल ठीक है, इसे करते रहिये।


प्रगति जाँचने का, यह एक सामान्य और बहुत अच्छा मापदण्ड है| अधिकांश लोगों के लिए यह काफी अच्छा है परन्तु, कभी-कभी हमारी रूचि कुछ विशेष चीजे जानने में होती है। वैसे तो जो मैं हूं, वह प्रगति नहीं कर सकता, वह पहले से ही सर्वोच्च है, परम है। पर जो प्रगति कर रहा है वह कुछ और ही है और अब तक आपने अनुमान लगा लिया होगा कि वो यह जीव है, यह मशीन है जो प्रगति कर रही है, यह विकसित हो रही है, स्मृति की परतों से जो संरचना बनी है, वो एक दिशा में विकसित हो रही हैं, तो यहाँ प्रगति से मेरा अभिप्राय है, जीव की प्रगति से है, यह मेरी प्रगति नहीं है।


तो  इस चर्चा के लिए हम माया में थोड़ा नीचे उतरते हैं और कह सकते कि "साधक" की प्रगति, या आपकी प्रगति या मेरी प्रगति। हम यहाँ जिस सत्य की चर्चा करेंगे वो सापेक्षिक सत्य हैं और हम इस प्रगतिशील मार्ग को स्वीकार करते हैं, कि माया द्वारा रचित यह संरचना विकास के मार्ग पर हैं, पर हम यह पूरी तरह से जानते है कि मैं पहले से ही हर तरह से परिपूर्ण और आनंदित हूँ। हम माया में उतरने जा रहे हैं और यहाँ हम इस मनुष्य जीव रूपी संरचना को देखेंगे। हम जानेंगे कि यह कैसे विकसित होता है? यह कैसे आगे बढ़ता है? तो हम व्यक्ति विशेष के गुणों के बारे में चर्चा करेंगे और हर चीज़ को बहुत विस्तार से जानेंगे।


जब हम अपनी प्रगति का जाँचते है तो हम इसे "आत्म-मूल्यांकन" कहते हैं जो आध्यात्मिक पथ पर हमारी अपनी प्रगति का निर्णायक  है। यह उन लोगों के लिए जरूरी है जो प्रगतिशील मार्ग पर हैं। जो ज्ञान मार्ग पर हैं, यह उनकी रुचि पर निर्भर करता है|  क्यूंकि ज्ञानमार्ग एक सीधा मार्ग है, इसलिए आप आत्ममूल्यांकन छोड़ भी सकते हैं क्योंकि ज्ञानमार्गी के लिए यह समय की बर्बादी ही होगी।


तो शुरू करते है पहले प्रश्न से कि हम आत्म मूल्यांकन क्यों करते हैं?

यह देखने के लिए कि हम कैसे प्रगति कर रहे हैं और यह पता लगाने के लिए कि हम कितनी तेजी से प्रगति कर रहे हैं| किसी भी त्रुटि को ठीक करने के लिए भी हम आत्ममूल्यांकन कर सकते है|  यदि हम प्रगति नहीं कर रहे हैं, तो कोई त्रुटि या कोई बाधा अवश्य होगी। यदि हम प्रगति नहीं कर रहे हैं तो हम अपना मार्ग बदलने, गुरु बदलने, परंपरा बदलने आदि का निर्णय ले सकते हैं और आप यहाँ स्पष्ट लाभ देख सकते हैं कि यदि हम अपनी प्रगति का मूल्यांकन करते हैं तो हमारा बहुत समय बच जाता है। यह एक कला है और अब हम इसे सीखने जा रहे हैं।


जैसे हम आत्म मूल्यांकन करंगे हैं, उसी विधि का उपयोग कर हम दूसरों का मूल्यांकन भी कर सकते है। हम उसी प्रक्रिया का उपयोग यह तय करने के लिए कर सकते हैं कि दूसरे कैसे प्रगति कर रहे हैं, उनके विकास का स्तर क्या है और इसी से सम्बंधित प्रश्नों का उत्तर प्राप्त कर सकते है..


जाने अनजाने हम वैसे भी दूसरों का मूल्यांकन करते ही है। उदाहरण के लिए- जैसे ही हम किसी व्यक्ति से मिलते हैं, हमारे अंदर एक स्वाभाविक प्रक्रिया चलती है और हम उस व्यक्ति का मूल्यांकन करना शुरू कर देते हैं, आप कह सकते है की दूसरों का मूल्यांकन अपने आप हो जाता है। हम उन्हें उनके व्यवहार के आधार पर आंकते हैं, उन्होंने क्या पहना है? उनके कपड़े, उनके जूते, वे कैसे बोलते हैं? वे किस राष्ट्रीयता, जाति, धर्म के हैं? उनकी शिक्षा क्या है, उनकी आर्थिक स्थिति क्या है? वे सुंदर हैं या कुरूप हैं? और इसी तरह के और भी कई प्रश्न होते है| मनुष्य का विकास ही इस प्रकार से हुआ है की वो बहुत जल्दी दूसरों का आंकलन करने लगता है। उत्तरजीविता के लिए  इसका बहुत लाभ है। उदाहरण ले लिए - क्या यह शख्स मेरा दुश्मन है या दोस्त है? क्या यह व्यक्ति एक उपयुक्त साथी है या नहीं? ऐसे कई दिलचस्प प्रयोग किये गए थे जिनके बारे में आपको इंटरनेट से जानकारी मिल सकती हैं|  ये सभी प्रयोग यह मापने की कोशिश करते हैं कि हम कितनी तेजी से निर्णय लेते हैं कि क्या दूसरा व्यक्ति संभोग के लिए एक उपयुक्त साथी है या नहीं|  इन प्रयोगों में पाया गया कि यह निर्णय लेने में केवल कुछ ही सेकंड लगते हैं और व्यक्ति हाँ या ना के उत्तर पर पहुँचें जाता है। मैं इस व्यक्ति के साथ कोई सम्बन्ध बनाऊंगा या नहीं ? इसका निर्णय लेने में सिर्फ कुछ सेकंड लगते हैं और हमें पता भी नहीं चलता कि ऐसा हो चुका है। निर्णय तो पहले ही हो चुका होता है बाद में तो हम बस उसका पालन करते हैं।


तो, दूसरे व्यक्ति का मूल्यांकन हमारे नियंत्रण के बिना स्वतः ही हो जाता है लेकिन यह व्यवस्थित और चेतनापूर्वक किया जा सकता है। एक बार जब आप अपने आप को जान जाते हैं, एक बार आप जान जाते हैं कि यह संरचना कैसे काम करती है, यह मशीन कैसे काम करती है, तो आप सभी लोगों को जानने में सक्षम होंगे क्योंकि सभी संरचनाएं समान है। बहुत थोड़ा सा अंतर होता हैं लेकिन ज्यादातर लोग एक जैसे ही हैं। 


वास्तव में एक बार जब आप किसी को पूरा जान लेते हैं, तो आप उनमें कुछ हेरफेर कर सकते हैं, आप उन्हें नियंत्रित कर सकते हैं|  दूसरों का मूल्यांकन करने की इस क्षमता का दुरुपयोग भी किया जा सकता हैं। आप जांच सकते हैं कि वह व्यक्ति कितना विकसित है और फिर आप अपना व्यवहार बदल सकते है या आप दूसरे व्यक्ति में बदलाव करने का निर्णय ले सकते हैं, इसलिए यहाँ मुझे आपको यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि आध्यात्मिक स्तर या विकास के स्तर का मूल्यांकन करने की इस क्षमता का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए। आप इसे दूसरों पर इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन यह आपके अपने मूल्यांकन के लिए है|  जब तक दूसरे अनुमति ना देवें तब तक उनका मूल्यांकन नहीं करना चाहिए। 

जब आप स्वयं पर्याप्त प्रगति कर लेंगे और आपको रुचि रखने वाले साधक मिलेंगे जो जानना चाहेंगे कि आप कैसे प्रगति कर रहे हैं? वे जानना चाहेंगे कि वे स्वयं कैसे और क्या कर सकते हैं जिससे आपके जितनी तेजी से प्रगति कर सके| तब आप उन्हें यह बताकर उनकी मदद कर सकते हैं कि आत्म-मूल्यांकन कैसे करें| आप बहुत समय तक उनका अवलोकन करने के बाद भी ऐसा कर सकते हैं। आपको पता चल जाएगा कि हर इंसान में विकसित होने की, प्रगति करने की समान क्षमता होती है बस सब एक ही स्तर पर नहीं होते है। यह एक कड़वा सच है और लोग इसे छिपाने की कोशिश करते हैं परन्तु आपको इसको छिपाने की जरूरत नहीं है। आप इसे स्वीकार कर सकते हैं, आप सभी को वैसे ही स्वीकार कर सकते हैं जैसे वे हैं। शर्मिंदा होने की कोई जरूरत नहीं है, राजनीतिक रूप से सही होने की कोई जरूरत नहीं है, खासकर तब, जब आप अपने जीवन के बारे में फैसला करते हैं| जब आप अपने जीवनसाथी या दोस्तों या यहां तक कि अपनी नौकरी के बारे में फैसला करते हैं तो मूल्यांकन बहुत उपयोगी है लेकिन इसका दुरूपयोग नहीं किया जाना चाहिए। लोगों से भेदभाव करना, मूल्यांकन की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा और वह मूर्खता है।


मुझे आपको यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि लोगों ने इस तरह का सामाजिक प्रयोग किया है और उन्होंने विकास के स्तर के आधार पर लोगों के साथ भेदभाव करके पूरी सभ्यताओं को नष्ट कर दिया। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई कितना विकसित है, सभी के साथ समान व्यवहार करने की आवश्यकता है| मुझे इसे दोहराना चाहिए इसलिए यहां कुछ चेतावनियां दी जा रही हैं। 

यह तरीका जिसकी हम अभी चर्चा करने जा रहे हैं, 100% सटीक नहीं है और हर किसी पर काम नहीं करेगा  क्योंकि ये मानसिक संरचनाएं बहुत जटिल हैं और ये 24 घंटे में हर समय बदलती रहती हैं। सभी संरचनाएं एक चक्रीय परिवर्तन से गुजरती हैं, ये वार्षिक रूप से एक चक्रीय परिवर्तन से गुजरते हैं और इनकी प्रगति होती है जो कुछ सप्ताहों से लेकर कई वर्षों में होती है।


तो आज आप किसी का मूल्यांकन कर सकते हैं और आप पाएंगे कि एक हफ्ते के बाद ही कुछ बदलाव हो गए हैं। शायद वह किसी से मिला हो, शायद उसने कोई दूसरी किताब पढ़ी हो, शायद उसके अंधविश्वास को किसी गुरु ने नष्ट कर दिया हो और इसी तरह की कई बातें हो सकती है|  वह अब पूरी तरह से अलग व्यक्ति है या शायद उसके परिवार में कोई मृत्यु हो गई है या वह किसी से प्यार करने लगा है, या शादी कर ली है या किसी ने उसे छोड़ दिया है, पहले वह एक खुशमिजाज व्यक्ति था, अब वह एक टूटे हुए रिकॉर्ड की तरह है और इसी तरह कुछ भी हो सकता है| 


इसलिए मूल्यांकन का परिणाम बदलता रहता है और आपका यह कभी स्थायी नहीं हो सकता है। आप बड़े रूप से एक समग्र मूल्यांकन कर सकते हैं, जो जीवन भर में बहुत अधिक नहीं बदलता है और इसप्रकार आप अन्य लोगों की और स्वयं की समस्याओं का निवारण कर पाएंगे| किसी भी तरह का इलाज करने का प्रयास न करें। आप एक मनोचिकित्सक नहीं हैं, इसलिए यह किसी भी प्रकार की चिकित्सा या उपचार का विकल्प नहीं है। यदि ऐसी परिस्थिति हो तो किसी विशेषज्ञ से सलाह लेंवे और अगर आपको लगता है कि आप प्रगति नहीं कर रहे हैं तो कोई भी बड़ा निर्णय लेने से पहले अपने गुरु से सलाह लें।

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