Wednesday, August 2, 2023

भोगवृति

नमस्कार,
ज्ञानांजलि में आप सभी का स्वागत है|  
आत्ममूल्यांकन की इस श्रृंखला में आज हम चर्चा करने वाले हैं  मानव विकास क्रम की दूसरी परत के बारे में  जिसे हमने भोगवृति  की परत कहां है| 

यदि हम इनके व्यवहार का अवलोकन करें तो आप पाएंगे कि ऐसा व्यक्ति हमेशा सुख प्राप्ति के पीछे लगा रहता है और किसी भी तरह का दर्द या पीड़ा नहीं चाहता है|  किसी भी तरह की मेहनत नहीं करना चाहता है|  किसी भी तरह का खतरा मोल नहीं लेना चाहता है और वही पाए जाते हैं जहां पर इन्हें सुख मिल रहा हो | 

खुशकिस्मती से ऐसे लोगों कों उत्तरजीविता की चिंता नहीं होती क्यूंकि उनके पास बहुत पैसा होता है

शायद उनके माता-पिता हैं बहुत पैसे वाले होते हैं, बहुत अमीर होते हैं और इसलिए उन्हें  बहुत आसानी से सबकुछ मिल जाता है|  इस कारण उनके पास रहने और मजे मौज मस्ती करने के अलावा और कुछ और बचता नहीं है

ऐसे लोग अधिकांश रूप से काम ना करने में और जो किसी भी आसान तरीके से पैसा कमाने का प्रयास करते हैं 
ये लोग शॉर्टकट चाहते हैं 

उन्हें अगर नौकरी भी मिलती है तो वह किसी ना किसी रिश्ते नाते की वजह से ही मिलती है या उनका कोई संपर्क होते हैं उन्हें नौकरी इसलिए नहीं मिलती क्योंकि वे उसके लायक है बल्कि इसलिए मिलती है क्योंकि उनके अच्छे संपर्क होते हैं या उनके कुछ अच्छे रिश्ते होते हैं|  

और ऐसे लोग अपना काम दूसरों पर थोपने का प्रयास करते हैं और यदि पैसा कमाते भी हैं तो वह सिर्फ खुशी प्राप्त करने के लिए , यदि पैसा उनको बहुत ज्यादा सुख दे रहा है तो ही वह उसको कमाने में रुचि रखते हैं ,नहीं तो कुछ नहीं करते है  

उन्हें अपने जीवन में एक ही डर होता है और वह है दर्द या पीड़ा का या मृत्यु का क्योंकि उन्हें लगता है कि यह जो दो चीज है वह उनके सुख प्राप्ति के रास्ते में बाधा है और इसी कारण से उन्हें जो वृद्धावस्था है या जो बुढ़ापा है उससे भी डर लगता है

ऐसे लोग अपनी उम्र छुपाने का प्रयास करते हैं, अपने बालों को काला रखते हैं या कुछ ऐसा दिखाने का प्रयास करते हैं जिससे उनकी उम्र छुपा सके 

ये लोग अपने सामान से और चीजों से बहुत ज्यादा आसक्त होते हैं, जुड़े हुए होते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्हें सामान से खुशी मिल रही है|  वह अपने स्वयं के शरीर को भी एक सामान की तरह ही उपयोग करते हैं जिससे उन्हें सुखभोग मिल सके

यही नहीं, वे दूसरों के शरीर को भी सामान की तरह समझते हैं और उसे सुख की प्राप्ति करना चाहते हैं|  

ऐसे व्यक्ति दूसरों को भी एक वस्तु की तरह ही देखते हैं 

और ऐसे लोग आपसे तभी संपर्क करेंगे जब वे आप से किसी तरह के सुख प्राप्ति की उम्मीद कर रहे हैं, उसके अलावा उन्हें आप में  कोई रुचि नहीं होगी या फिर कभी कभी आपसे संपर्क करेंगे ताकि वह अपना समय काट सके क्योंकि वह बोर हो रहे हैं तो वह आपको फोन करेंगे या फिर आपको मैसेज करेंगे क्योंकि वह कुछ मनोरंजन चाहते हैं 

तो इस तरह कुछ पंक्तियों से आपको उनकी मानसिकता के बारे में पता चल सकता है या आप उनको एक चित्र के रूप में चित्रित कर सकते हैं और आप जान सकते हैं कि बहुत सारे लोग जिन से आप मिले हैं वह इस परत पर हैं|  

यदि आप उनकी बातों पर ध्यान दें उनकी वाणी का अवलोकन करें तो आप पाएंगे कि वह सिर्फ उस बारे में बात करते हैं जिससे उनको सुख की प्राप्ति हुई है, जैसे कि वह कहां घूमने गए, उन्होंने क्या खाया, उनके कौन कौन से साथी रहे  है, थिएटर में कौन सी पिक्चर लगी है, कौन सा संगीत अच्छा है, कौन से कपड़े अच्छे हैं, जूते कौनसी कम्पनी के सबसे अच्छे होते है आदि आदि...  

वह इसी तरह की चीज़ों के बारे में बात करेंगे और भी चीज़ें है जैसे उन्हें क्या चाहिए और कितना अच्छा होगा अगर उन्हें वह चीज मिल जाए|  

कभी-कभी उन्हें दर्द या पीड़ा होने का डर भी लगता है और यह बात भी वे अपनी वाणी से अभिव्यक्त करते हैं की किस चीज का उन्हें डर है और किस चीज से घबराते हैं या कोई ऐसी चीज जो उन्हें सुख प्रदान नहीं कर रही है तो उसके बारे में चिंता करते हैं| 

यदि कोई चीज सुख प्रदान नहीं करती है तो वह उसकी शिकायत भी करते हैं और उसके बारे में अपनी चिंता व्यक्त करते हैं 

वह ज्यादा शिकायत तब करते हैं जब उनके जो सुख प्राप्ति के साधन है वे उनसे छीन लिए जाते हैं|  

यदि आप उनकी बातों को देखे तो जो उनकी बातें हैं, जो गपशप है, वह बोरिंग नहीं होती है या अरुचिकर नहीं होती है|  उनमें बहुत ज्यादा मसाला होता है बहुत ज्यादा मनोरंजक होती है| ऐसे लोग बहुत अच्छे वक्ता बनते हैं या मनोरंजन बहुत अच्छा करते हैं|  

वह दूसरों का मनोरंजन करते हैं क्योंकि उससे उनका खुद का मनोरंजन होता है और यह जीवन को बहुत ज्यादा मनोरंजक लगती है|

आप किसी भी विषय पर बात कर रहे हो, चाहे वह कोई भी बात हो, राजनीति की कोई बात हो या कोई और बात हो उससे ये  सीधा अपनी इच्छाओं की अभिव्यक्ति पर आ जाते हैं या फिर वह ऐसी बात करेंगे कि कौन सा एक्टर अच्छा है या कौन सी अभिनेत्री अच्छी दिखती है, कौन सा अभिनेता अच्छा है| किसी एक विषय पर बात करने की बजाय सिर्फ यह बात करते हैं कि उन्हें क्या चाहिए और क्यों चाहिए|  

आप देखेंगे कि इनका जो अहंकार है वह बहुत प्रबल होता है और वह पूरी तरह से मैं - मैं  रहता है उनका व्यवहार देखने की आवश्यकता नहीं है अगर आप भी करें तो भी आप जान जाएंगे या फिर आप उनसे थोड़ा सा बात करें तो आप जान जाएंगे या 

फिर एक चित्र देखकर भी आप जान सकते हैं की ऐसा व्यक्ति किस तरह का है |  

उनके पास बात करने के लिए बहुत अच्छा कुछ नहीं होता है फिर भी उन्हें कहीं ना कहीं हमेशा कोई ना कोई मिल जाता है बात करने के लिए क्यूंकि कौन है जो खुशी नहीं चाहता, कौन है जो आनंद में नहीं रहना चाहता| 

जैसे जैसे ये लोग बड़े होते हैं वे एक ही बात को दोबारा करने लगते एक ही जैसी बातें करते हैं और ज्यादातर झूठ ही होता है जिसमें वह मसाला लगाकर झूठ बोलते रहते हैं|  

यदि आप उनके विचारों का अवलोकन करें तो आप पाएंगे कि उनकी जो सारी कल्पनाएं हैं, वह खुशी और मौज मस्ती प्राप्त करने के आसपास ही होती है, भोग से जुड़ी हुई होती है 

आप कह सकते हैं की ख्याली पुलाव मैं हमेशा उस चीज के बारे में सोचते हैं जो उन्हें सुख प्रदान कर सके 

वै सिर्फ उस चीज़ के बारे में सोचते है जिनसे उन्हें सुख की प्राप्ति हो सके, चाहे वह शरीर से संबंधित सुख हो या इंद्रियों से प्राप्त होने वाला सुख वे हमेशा उसी चीज के बारे में कल्पना करेंगे या सोचेंगे 

ऐसे लोग कुछ योजना भी बनाते हैं तो वह यह जो योजना है वह ऐसी वस्तु प्राप्त करने के लिए होती है जो उन्हें सुख प्रदान कर सकें 

यदि उन्हें सुख प्राप्ति की उम्मीद नहीं है तो वह कुछ योजना भी नहीं बनाते और फिर यदि योजना बनाते हैं तो वह किसी भी तरह के दुख दर्द से दूर रहने की योजना बनाते हैं और उससे ऊपर उनका जो दिमाग है वह काम नहीं करता है, वही रहता है, इससे ऊपर वह कुछ और सोचने से काबिल नहीं है|  यह कुछ और सोच ही नहीं सकते|  

यदि आप भोग और सुख प्राप्ति के अलावा कुछ और बात करेंगे तो उन्हें नींद आ जाएगी 

यदि कुछ बहुत ही जटिल विषय पर आप बात करते हैं तो वह उसे समझ नहीं सकते क्योंकि ये लोग इतना सोचते ही नहीं है, उनका दिमाग इसके आगे काम करना बंद कर देता है|  

उनका जो दिमाग है वह या सुख प्राप्ति की चीजों से पूरी तरह से भ्रष्ट हो चुका है, दूषित हो चुका है और 

जैसे ही आप उनकी इच्छा पूर्ति के बारे में कुछ बात करेंगे तभी ये जाग जाएंगे और जहां पर भी सुख प्राप्त की बात है उस चीज में उन्हें बहुत आनंद आता है|  

ऐसे लोगों का कुछ लोग फायदा भी उठा सकते हैं क्योंकि इनमें बुद्धि की थोड़ी कमी होती है और इच्छाओं का जो बल बहुत अधिक होता है, इच्छाए बहुत प्रबल होती है और यह लोग अपनी इच्छा पूर्ति के लिए कुछ भी कर सकते हैं सुख प्राप्ति के लिए कुछ भी कर सकते हैं 

इसीलिए मैंने आपको चेतावनी दी थी कि मूल्यांकन करने का यह जो तरीका हम उपयोग कर रहे हैं, इसका दुरुपयोग संभव है और बहुत लोग करते भी हैं

कुछ लोग बहुत ज्यादा दुष्ट प्रवृत्ति के होते हैं या दयालु नहीं होते हैं, चालाक होते हैं, शातिर होते हैं और इसलिए वह दूसरों को बदलने का प्रयास करते हैं| 

वे इस तरह का मूल्यांकन करके, दूसरे को समझ के, दूसरे को जान के उनको अपने फायदे के लिए बदलने का प्रयास करते हैं जो की ठीक नहीं है| 

जिनकी भोगवृति की परत अधिक साक्रिय है, ऐसे लोग बहुत आसानी से उनके जाल में फंस जाते हैं 




यदि आप उनके सम्बन्धों का अवलोकन करें तो आप पाएंगे कि वह किसी के भी प्रति तब तक ही ईमानदार है जब तक उन्हें उस रिश्ते से सुख की प्राप्ति हो रही है, आनंद मिल रहा है, भोग मिल रहा है, कुछ आरामदायक मिल रहा है या उन्हें सुरक्षा मिल रही है या ऐसा कोई रिश्ता जो उनकी इच्छाओं की पूर्ति करें उनकी सारी जो जरुरतों को पूरा करें तो ही रिश्ता 

वह किसी भी व्यक्ति में रुचि नहीं रखता है, वह अपने आप में रुचि रखते हैं 

अपने आपके इच्छाओं की पूर्ति में और सुख प्राप्ति के चीजों में उनकी रूचि होती है 

उनका जो सम्बन्ध है वह सिर्फ सुख प्राप्ति का एक माध्यम मात्र है और यदि उन्हें कोई अच्छा माध्यम मिले तो  उस पर चले जाते हैं|  

आप पाएंगे कि ऐसे लोगों के अपने जीवन में बहुत सारे सम्बन्ध होते हैं क्योंकि वह किसी एक सम्बन्ध से संतुष्ट नहीं होते है और सम्बन्ध बदलते रहते हैं और 

यदि उन्हें कोई नया नहीं मिलता और पुराने सम्बन्ध में यदि उन्हें सुख प्राप्ति हो सके तो उसके पास भी चले जाते हैं
और वह उसके बारे में एकदम बेशर्म होते हैं, उनको कोई फर्क नहीं पड़ता, उन्हें सिर्फ अपने आप से मतलब है

यदि आप पुराने समय में देखें तो आप पाएंगे कि ऐसे लोगों की बहुत सारी पत्नियां होती है|  
ऐसे व्यक्ति बहुत सारी पत्नियां इसलिए नहीं रखता था ताकि वह समाज सेवा करना चाहते हैं या उन्हें भोजन देना चाहता है| यदि किसी व्यक्ति की बहुत सारी पत्नियां होती थी तो ऐसा माना जाता था कि वह बहुत ही सम्मानजनक है, 

लेकिन ऐसे व्यक्ति की बहुत सारी पत्नीयां उस के भोग का साधन बनती थी, सुख का साधन होती थी या फिर वो दास की तरह उनकी सेवा करती थी और उनके जो बच्चे थे वो भी उनके दास बन जाते थे और फिर वह उसके लिए काम करते थे 

ऐसे व्यक्ति कुछ ज्यादा काम नहीं करते हैं, फिर भी बहुत अमीर होते हैं और आप पाएंगे कि ऐसे व्यक्ति बहुत ज्यादा आराम पसंद होते हैं और अधिकांश समय खाने और सोने में व्यतीत करते हैं 

जिनको यह सब जीवन में नहीं मिलता है, वह लोग इसके पीछे दौड़ते हैं 

वे सोचते हैं कि शायद इसी में सुख मिलेगा और ऐसे लोग आपको आज के समय में भी मिलेंगे|  

उनके जो प्रेरणा स्रोत है वह भी इस तरह की वृति वाले ही लोग होंगे, जो हमेशा छुट्टियों पर रहते हैं, घूमते फिरते रहते हैं या हमेशा महंगे कपड़ों में लिपटे हुए रहते हैं| ऐसा दिखाते हैं कि मैं बहुत खुश हूं, बहुत आनंद में हूं|  

ऐसे लोग आपको किसी मैगजीन के कवर पर दिखेंगे या टीवी पर दिखाई देंगे या फिर इंटरनेट पर दिखाएंगे तो ऐसे लोग के लिए वे आदर्श होते हैं 

ऐसे लोग किसी भी व्यक्ति के प्रति ईमानदार नहीं होते हैं 

वह सब को धोखा ही देते रहते हैं| आप इन पर विश्वास नहीं कर सकते, 

उनके जो संबंध होते हैं वह लेनदेन पर आधारित होते हैं, आप मुझे इतना दीजिए, मैं आपको इतना दूंगा 
ऐसे लोग हमेशा अपनी तरह के लोगों के साथ मिलते जुलते मिलते हैं 

उनको अपने रक्त संबंधियों के प्रति अधिक आसक्ति नहीं होती है या ज्यादा उनसे मिलते जुलते नहीं है| ऐसा नहीं हैं की इनके लिए वो महत्वपूर्ण नहीं होते हैं| लेकिन यदि संबंधी, उन्हें कुछ पैसा दे, या कुछ चीजें दे, या ऐसा कुछ दे जिनसे उनके इच्छाएं पूरी हो सके तो ही वे अपने संबंध बनाए रखते हैं बाकी नहीं 

ऐसे लोग बहुत अच्छे दोस्त बनते हैं क्योंकि वे खुशी चाहते हैं| तो दोस्त अच्छे बनते हैं| यदि आप उनके जैसे हैं तो आपके बहुत अच्छे दोस्त बनेंगे 

माना कि जो उनकी दोस्ती है वह ऊपरी तौर पर ही होती है, फिर भी आपके जैसे यदि है या आपकी सोच उनसे मिलती है तो बहुत अच्छे दोस्त बन सकते हैं| पर यह आपको अगले ही पल छोड़ भी सकते हैं लेकिन जब तक यह दोस्त है तब तक वो अच्छे दोस्त बनते हैं, दिखावे के लिए भी होता है तब भी दोस्ती बहुत अच्छी होती है 


अगर ऐसा नहीं है तो वह आपसे जुड़ेंगे नहीं और आपसे आसक्त नहीं होंगे क्योंकि वह अपने आप को स्वतंत्र मानते हैं 

किसी भी तरह के उत्सव में, या किसी तरह के मिलन समारोह में, ऐसे लोगों ही संगति करना बहुत अच्छा होता है क्योंकि यह बहुत ज्यादा मनोरंजक होता है 

इनके पास बहुत कुछ कहने को होता है, बहुत ज्यादा मजाकिया होते हैं

बहुत अच्छे कपड़े पहनते हैं, सुंदर दिखते हैं, उनके पास कुछ नया दिखाने के लिए होता है

नई-नई चीजें होती है, नई घड़ी, नए कपड़े, नए मोबाइल और ऐसी बहुत सारी चीजें होती है इसलिए लोग इनके पास पाये जाते हैं और यह किसी समारोह में भी इसीलिए जाते हैं ताकि वहां पर कुछ दिखा सके इसलिए नहीं जाते क्योंकि यह सामाजिक है|  

क्यूंकि ये सुख प्राप्त करना चाहते हैं तो वह अपने शरीर को भी सुंदर रखते हैं, बहुत सुंदर होते हैं और इनका आकर्षण भी बहुत ज्यादा होता है 

यह कभी अपने शरीर को बीमार या खराब नहीं होने देते, मोटे नहीं होते

बहुत से लोग इनकी तरफ आकर्षित होते हैं क्योंकि ये अच्छे दिखते हैं, सुंदर दिखते हैं| 

ऐसे लोग जब बूढ़े होने लगते हैं तो अलग-अलग तरीके अपनाते हैं जिससे वो बूढ़े ना देखें और यह इस तरह की एक भ्रांति में पड़ जाते हैं कि मैं अभी तक बूढ़ा नहीं हुआ| जब वो बूढ़े होने लगते हैं तो उनका जो व्यवहार है वह बहुत ही अजीब सा हो जाता है|  





यदि आप उनके मनोरंजन के साधन देखें तो आप पाएंगे के सबसे महत्वपूर्ण जो चीज़ उनके लिए है, वह है संभोग और 
अगर वह यह नहीं कर रहा है तो वह ज्यादा भोजन करते हुए पाएं जायेंगे 

उन्हें स्वादिष्ट भोजन चाहिए होता है क्योंकि उन्हें जो साधारण भोजन है वह स्वादिष्ट नहीं लगता और उनको हमेशा नई चीजें चाहिए होती है, खाने के लिए तो ज्यादा स्वादिष्ट हो|  

ऐसे लोग भोजन के बहुत अच्छे उपभोक्ता होते हैं और ऐसा नहीं है की बहुत ज्यादा खाते हैं पर उन्हें स्वाद अच्छा चाहिए 

यह लोग हमेशा छुट्टी मनाने के लिए तैयार रहते हैं, कोई काम नहीं करना चाहते हैं क्योंकि यही उनके लिए मनोरंजन का साधन है तो वह घूमना बहुत पसंद करते हैं| 

उनके पास बहुत पैसा भी होता है इसलिए वह अपना सारा पैसा घूमने फिरने में खर्च कर सकते हैं 

उन के बहुत सारे दास और दासिया होते हैं क्योंकि वह काम नहीं करना चाहते हैं 

यह शराब और ड्रग्स के आदी हो जाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्हें उससे सुख की प्राप्ति होगी 

उनका दिमाग है और शरीर है, वह सुख प्राप्त करने और भोगों का आदि हो जाता है और 

बुढ़ापे में यदि वह बहुत अच्छे नहीं लगते हैं या उनके पास कोई और आय का साधन नहीं है तो सस्ते मनोरंजन के साधन है उसके आदि हो जाते हैं 

इस तरह की किताबें पढ़ते हैं या इस तरह की कहानियां सुनना पसंद करते हैं जहां पर सस्ता मनोरंजन है 

आप ऐसे लोगों के द्वारा पढ़ी जाने वाली किताबों का कवर देखकर ही उसको पहचान सकते हैं क्योंकि ऐसे लोगों के लिए बहुत सारी किताबें लिखी जाती है 

ऐसे लोग के लिए बहुत सारी पिक्चर भी बनाई जाती हैं जहां पर हर दूसरे दृश्य में कोई ना कोई शराब पीता हुआ दिखाई जाएगी या किसी भी तरह का बुरी आदत दिखाई जाएगी जैसे सिगरेट पीना शराब पीना ऐसे सारे जो दृश्य हैं वह इस तरह की पिक्चरों में बहुत ज्यादा होंगे या तो उसमें एक बहुत बड़ी कुछ कार होगी यहां पर बहुत सारी स्त्रियों को दिखाया जाएगा इस तरह की बहुत सारी चीजें उनसे संबंधित होंगे तो इस तरह का उनका मनोरंजन होता है जो काफी मनोरंजक होता है परंतु उससे ज्यादा कुछ नहीं 


विकार 
अपने भोग की प्राप्ति के लिए, सुख भोग के लिए वह कुछ भी कर सकते हैं, झूठ भी बोल सकते हैं और इतना झूठ बोलते हैं कि कभी उसका अंत नहीं होता और अपने जो के साधन है उन को बनाए रखने के लिए झूठ बोल सकते हैं

ऐसे लोग बेईमान भी होते हैं और भ्रष्ट होते हैं वह सब कुछ करेंगे जिससे उनका काम चलता रहे 

वे अपनी इच्छाओं की पूर्ति करने के लिए बल का भी प्रयोग करते हैं या हिंसा का प्रयोग करते हैं 

क्योंकि यहां पर विकार आ गया है तो इनकी कामवासना भी थोड़ी सी विकृत हो जाती है इसलिए यह लोगों को प्रताड़ित भी कर सकते हैं और अपने लिए ही किसी को मार भी सकते हैं और 

अपने लिए कोई अपराध भी कर सकते हैं 

यदि किसी को पता चल जाए तो उस व्यक्ति को मार भी सकते हैं तो अपराध को छुपाना चाहते हैं 

ऐसे लोगों को बहुत सारी चीजों की लत लग जाती है 
हर चीज उनके लिए लत ही होती है जैसे साबुन, परफ्यूम, मेकअप, अल्कोहल, भोजन  सब कुछ 

मानसिक विकार होने पर ऐसे लोग झूठ बहुत बोलते हैं | 

कभी-कभी इनके पास इतना पैसा नहीं होता है कि यह अपना जीवन का स्तर बनाए रख सके तो फिर ऐसे लोग आत्महत्या की तरफ बढ़ते हैं| 

पशुवृत्ति का व्यक्ति अपने आप को कभी भी नहीं मारेगा लेकिन ऐसे लोग अपने आप को मार सकते हैं और इन से भी ज्यादा जो आत्महत्या करने वाले जो लोग हैं वह भावनात्मक परत पर होते हैं भाव वृद्धि की परत पर होता है क्योंकि इनको जो सुख भोग है वह बहुत अधिक चाहिए होता है तो इसकी इनके लिए जो दुख है वह भी बहुत अधिक होता है

एक आम आदमी जितना दर्द या दुख महसूस नहीं करेगा उससे कई गुना अधिक इस परत पर होने वाले लोग उसका अनुभव करते हैं 

एक बहुत छोटी सी चीज भी उनके लिए बहुत दुख पैदा कर सकती है, वो इनके लिए बहुत बड़ी बात हो जाती है बहुत बड़ा धक्का लगने वाली जैसी बात होती

आप सोच रहे होंगे कि ऐसे बहुत से लोग हैं जिनको मैं जानता हूं जो इस तरह की व्रती दर्शाते हैं और आप सही कह रहे हैं क्योंकि अधिकांश जो मनुष्य हैं वह और कुछ नहीं सिर्फ भोगव्रती की परत पर ही है 

तो यदि आप इस परत पर पाए जाते हैं तो जो समाज है वह आपको एक पुरस्कार देगा क्योंकि अधिकांश लोग ऐसे ही हैं 

क्योंकि आपके पास घर है, भोजन है, पैसा है, और अब आप भोगव्रती में लिप्त हैं, सुख भोग में लगे हुए हैं तो लोग उसकी प्रशंसा करेंगे और वह कहेंगे कि इसमें कुछ गलत नहीं है, सब कुछ सही तो है|  

आपको ऐसे लोग हर जगह मिलेंगे जैसे अखबार हो, टीवी हो, या किसी भी तरह के विज्ञापन हो, हर जगह आपको यही सब कुछ मिलेगा क्योंकि उस व्यक्ति को जो सुख मिले हैं वह हमारे समाज के लिए एक आदर्श है 

ऐसा क्यों है क्योंकि अधिकांश लोग जो है पशुवृत्ति से प्रगति करते हुए इस परत पर आये हैं इसीलिए जो अधिकांश लोग हैं वह उसे सफलता का मापदंड मान लेते हैं 

इस परत पर कुछ अच्छी चीजें है, सुख हमेशा बुरा नहीं होता और दुख दर्द को हटाना या दूर रखना भी बुरा नहीं है 

लेकिन यदि इसके अलावा आपके जीवन में और कुछ नहीं हो रहा है तो फिर आप निश्चित रूप से कह सकते हैं कि आप भोगवृत्ती या उससे नीचे के परत पर अटक गए हैं 

आप उससे आगे प्रगति नहीं कर रहे हैं तो क्या किया जा सकता है? 
ऐसे व्यक्ति, जो निचली परतो पर है को यह नहीं पता हो सकता लेकिन ऊपरी प्रति व्यक्ति बता सकते हैं कि निचली परतो में क्या किया जा सकता है
 
ऊपरी परतों के लोग अपने से नीचे की परतों में सब कुछ नियंत्रित कर सकते हैं 

तो इसलिए नीचे की परतों के लोग स्वयं से प्रगति नहीं कर सकते हैं 

तो अगर आप ऐसे लोगों को बोलेंगे कि देखो इस तरह का व्यवहार ठीक नहीं है तो वे बोलेंगे कि क्यों? क्या बुराई है अच्छा दिखने में? क्या बुराई है अच्छा खाने में? अच्छा पहनने में? अच्छे से रहने में? या फिर लड़कियां मुझे पसंद करती हैं इसलिए तुम मुझसे जलते हो, इसीलिए तुम मुझे रोकने के लिए ये सब कह रहे हो 

परेशानी यह है कि यह सब एक दिन समाप्त हो जाएगा और उसके बाद जो परिवर्तन होगा उससे आप कैसे निपटेंंगे?  

जैसा कि चंद्रमा 15 दिन बढ़ता है और फिर 15 दिन घटता है तो जब बुरा वक्त आता है तो इन लोगों को बहुत दुख का सामना करना पड़ता है और जो दुख है वो उनको ऊपर की तरफ ले जाता है नहीं तो और कुछ नहीं देखेंगे 

और वहां पर भी कुछ लोगों को यह मौका मिलता की वे प्रगति करे बाकी सब तो सिर्फ दुख से भागने का प्रयास करते हैं|  वह चाहते हैं कि यहां पर सब ठीक कर दिया जाए जबकि वह पहले से ही सब कुछ बिगड़ चुका होता है 

तो अगर आपको लगता है कि आप स्वयं इस परत पर है तो परेशान होने की आवश्यकता नहीं है 

यह बदला जा सकता है| जब समय सही हो, जब परिस्थितियां सही हो जाए और सारी इच्छाएं पूरी होती है, तो उस समय प्रगति हो जाएगी उसकी चिंता करने की आवश्यकता नहीं है और यह मनुष्य होने का एक भाग है 

परंतु यदि यही सब चल रहा है तो फिर आपको सोचने की आवश्यकता है कि कैसे इस से बाहर निकला जाए 

ऐसे लोगों के लिए कुछ मार्ग का सुझाव दिया जा सकता है जिसमें सबसे पहले आता है 
भक्ति मार्ग क्योंकि ऐसा व्यक्ति भक्ति को अपने सुख का साधन मान सकते हैं और फिर उनके जो सांसारिक सुख हैं वो धीरे धीरे छूट जाएंगे और 

यह किसी धार्मिक संस्थान से भी जुड़ सकते हैं जो उन्हें पसंद हो और ऐसी जीवनशैली अपनाएं जो उस धर्म के द्वारा बताई गयी हो जैसे बहुत ज्यादा मत खाइए, शराब मत पीजिये, एक से ज्यादा साथी मत रखिए या ब्रह्मचर्य का पालन करिए तो यह सब चीजें धर्म हमें सिखाता है और यह ऐसे ही लोगों के लिए बना है और इसीलिए कोई धार्मिक संस्थान से जुड़ने का सुझाव दिया जाता है लेकिन आज के समय में यह थोड़ा गलत भी हो सकता है क्यूंकि धार्मिक संस्था के नाम पर पाखंड बहुत फ़ैलता है तो थोड़ा बुद्धिमानी से तय करना चाइये की किस संसथान से जुड़ रहे हैं   

कुछ लोगों के लिए कर्म योग की सलाह भी दी जाती है क्योंकि यह बहुत ही आलसी होते हैं और काम नहीं करना चाहता है तो थोड़ी बहुत जो सेवा है उसका सुझाव दिया जाता है और उसको करके सुख प्राप्त कर सकते हैं और धीरे-धीरे दूसरों की सेवा करना अधिक सुखदायक हो जाता है 

अपने आप की इच्छा पूर्ति करने से ज्यादा या अपने स्वार्थ की पूर्ति से ज्यादा अच्छा हो जाता है दूसरों की सेवा करना और वह फिर प्रगति का मार्ग बनता है 

यदि कोई इस परत पर है तो उनकी प्रगति बहुत जल्दी नहीं होती है|  एक पशुवृत्ति वाला मनुष्य जल्दी प्रगति कर लेता है परन्तु भोग व्रती की परत से जल्दी प्रगति नहीं होती क्योंकि यहां पर आकर्षण बहुत ज्यादा है और सूख बहुत ज्यादा हैं इसलिए किसी के भी पास से ऊपर जाने का कोई महत्वपूर्ण कारण नहीं होता है| क्यूंकि वो सुखी है और सब कुछ ठीक है तो वहीं पर अटके रह जाते हैं

यदि इच्छा बहुत ज्यादा है तो तंत्र मार्ग का भी सुझाव दिया जाता है जहां पर इच्छा बहुत जल्दी पूरी हो जाती है और फिर जो बचा हुआ जीवन है वह सब कुछ ठीक करने में निकल जाता है 

तंत्र मार्ग क्या करता है की एक बहुत ही जल्दी मिलने वाली जो संतुष्टि है वह प्रदान करता है और बहुत तुरंत मिलने वाली सुख प्रदान करता है और हम जानते हैं बहुत अच्छे से कि एक बार जब सुख मिल जाता है तो जो मनुष्य है वह उससे ऊब जाता है अगर वह बहुत जल्दी मिल जाए और हर जगह वह एकदम धूल मिट्टी की तरह उपलब्ध हो तो कोई भी व्यक्ति उसको नहीं चाहेगा 

हम वह चाहते हैं जो किसी के पास ना हो और जो तंत्र मार्ग आपको सब कुछ देता है और इसलिए आपकी जो भी इच्छा है वह बहुत जल्दी समाप्त हो जाती है, किसी भी तरह की सुख से बोरियत हो जाती है और फिर उनके सामने एक खालीपन की स्थिति आ जाती है और फिर यही खालीपन उनके आगे की परतो की तरफ जाने का रास्ता दिखाती हैं और 

परंतु जो मार्ग है वह व्यक्ति के ऊपर निर्भर करता है, प्रत्येक व्यक्ति को किस तरह का मार्ग से जाया जाए वो गुरु पर निर्भर करता है उनको और किसी तरह के योग का सुझाव भी दिया जा सकता है 

जहां पर सब कुछ थोड़ा सा सामान्य, बहुत ज्यादा जटिल ना हो तो सामान्य से प्रक्रिया है जो अष्टांग योग के कुछ साधन है कुछ अंग है उनको उनका सुझाव दिया जा सकता है|  प्रत्याहार तक जो इंद्रिय सुख है उनको उनसे बचने का सुझाव और यह गुरु ही सिखा सकते हैं एक बहुत दृढ़ संकल्प बनाने की जरूरत है ताकि अपनी ऊर्जा है उसको सुख भोग में व्यर्थ ना करें तो 

अब आपको जो योगिक क्रियाएं हैं उनके पीछे की का कारण समझ आ रहा होगा कि क्यों ऐसी चीजों को करने से रोका जाता है ताकि एक व्यक्ति का चित् जो है वह अनुशासित हो 

यह सब के लिए नहीं है यह सिर्फ उस व्यक्ति के लिए हैं कुछ और कार्य नहीं करता है इसलिए बलपूर्वक उसे रोकने का प्रयास किया जाता है|  

उसके पास यह सब करने का कोई कारण नहीं होता या तो उनके जीवन में कुछ ऐसा घटित होता है जिससे उन्हें लगता है कि यहां पर कुछ ठीक नहीं है तभी वह आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं या तो उनके जीवन में कोई मर गया हो या उनका कोई साथी मर गया हो या फिर वह बूढ़े हो रहे हो और मृत्यु को अपने सामने खड़े देखते पा रहे हो और उन्हें नहीं पता हो की इससे बाहर कैसे निकलना है तभी एक चेतना जागृत होती है तभी वह सोच पाते कि हां अब मुझे इससे आगे बढ़ना है तब वह सोचते हैं कि अब मुझे यहां पर कुछ संतुलन की आवश्यकता है 

तभी वह किसी गुरु के पास जाएंगे और गुरु उन्हें कुछ योगिक साधनाएं बता सकते हैं और 

लोगों के बहुत सारे जीवन इसी परत पर व्यतीत हो जाते हैं | उनका कारण शरीर को अभी अभी इस परत  पर भेजा गया है जो मनुष्य का शरीर है 

गुरु को यह पता होता है कि कैसे इस व्यक्ति को इस परत से आगे ले जाना है पर इसमें समय लग सकता है और 

यदि आप किसी ऐसे समय में पैदा हुए हैं जहां पर जो सुख भोग है, वह हर जगह है, तो फिर और ज्यादा समय लग सकता है आप हजारों सैकड़ों जन्म इस परत  पर व्यतीत कर सकते हैं 

सब कुछ खराब या अंधकारमय नहीं है और उनका भविष्य भी है पर ये जो यात्राएं है वो थोड़ी लंबी हो सकती है



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